कोलकाता, 28 जून (आईएएनएस)। फुटबाल के लिए सबसे अधिक जुनून रखने वाले शहर कोलकाता को ब्राजील और अर्जेटीना के फीफा विश्व कप की दौड़ में बने रहने से राहत है।
इन दोनों ही टीमों की शुरुआत विश्व कप टूर्नामेंट में अच्छी नहीं हुई थी। ऐसे में उनका नॉक आउट में पहुंचना प्रशंसकों के लिए जश्न से कम नहीं है।
साल 1977 में कोलकाता के सबसे बड़े फुटबाल क्लब मोहन बागान ने पेले के न्यूयॉर्क कोस्मोस की मेजबानी की थी। इसका मैच ईडन गार्डन्स में खेला गया था। इस मैच के साथ ही ब्राजील के लिए यह शहर दूसरा घर बन गया था।
इस स्थिति में 1986 में बदलाव आया, जब डिएगो माराडोना के शानदार प्रदर्शन के दम पर अर्जेटीना ने विश्व कप जीता था। ऐसे में कोलकाता इस टीम का भी प्रशंसक बन गया।
इतने दशकों में विश्व कप के हर संस्करण के दौरान ब्राजील के राष्ट्रध्वज और अर्जेटीना की जर्सी के रंग में रंगा कोलकाता नजर आता है। हर क्षेत्र का इन टीमों को समर्थन देने का अपना एक अनूठा तरीका होता है।
इस बार अर्जेटीना के स्टार लियोनेल मेसी और ब्राजील के नेमार डी सिल्वा के लिए शुरुआत अच्छी नहीं रही, लेकिन इन दोनों ही टीमों ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और अपने अंतिम ग्रुप मैचों को जीतने के साथ नॉक आउट में प्रवेश हासिल किया।
भारतीय फुटबाल टीम के पूर्व स्ट्राइकर श्याम थापा ने आईएएनएस से कहा, “इस खेल का शहर में इतना जुनून है कि अगर इन दोनों में से कोई भी एक टीम अंतिम-16 में नहीं पहुंचती, तो कुछ बड़ी दुर्घटना जरूर होती।”
थापा ने कहा, “मुझे याद है जब पेले 1977 में इस शहर में आए थे और किस तरह से कोलकाता के प्रशंसकों ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद से ही ब्राजील को यहां दूसरा घर मिल गया। इसके बाद माराडोना ने भी अपने बेहतरीन प्रदर्शन से यहां के लोगों को अर्जेटीना का प्रशंसक बना लिया।”
दक्षिण कोलकाता के बाघाजति और देशप्रिय पार्क में नाईजीरिया के खिलाफ मैच में मेसी के स्कोर करने के बाद पटाखे जलाए गए थे।
विश्व कप की मौजूदा विजेता जर्मनी के भी प्रशंसक कोलकाता में हैं। हालांकि, यह टीम इस बार अंतिम ग्रुप मैच में दक्षिण कोरिया से हारने के बाद विश्व कप से बाहर हो गई।
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