नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक जगहों पर शिशु पोषण और बाल देखभाल कक्षों के निर्माण की मांग करने वाली याचिका पर बुधवार को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, राज्य सरकार और नगर प्रशासन से जवाब मांगा है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने केंद्र सरकार और अन्य अधिकारियों से सार्वजनिक स्थानों पर शिशु पोषण और बाल देखभाल कक्षों के निर्माण के लिए दिशानिर्देशों की मांग करने वाली याचिका पर उठाए गए कदमों पर रपट दाखिल करने को कहा है।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दी है। पीठ नौ महीने के बच्चे अयान की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। दरअसल बच्चे की मां नेहा रस्तोगी और वकील अनिमेश रस्तोगी ने बच्चे के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है और अदालत से देश में नवजातों और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने में हस्तक्षेप की मांग की है।
पीठ ने सरकारी एजेंसियों से कहा कि जब पूरे विश्व में शिशु आहार कक्ष हैं, तो इनका निर्माण भारत में क्यों नहीं किया गया।
याचिका में कहा गया है, “सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान सुविधा की कमी के कारण महिलाओं के निजता के अधिकार को क्षति पहुंच रही है। बड़े पैमाने पर महिलाओं को परेशान किया जाता है और उनका मजाक बनाया जाता है।”
उन्होंने कहा, “सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान एक बहस योग्य मुद्दा बन चुका है। सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान अभी भी कई युवा माताओं के बीच असहजता की स्थिति पैदा करती है।”
याचिका में कहा गया है, “निजता के अधिकार व जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। राज्य का यह कर्तव्य है कि वह इन अधिकारों को सुरक्षित और लागू करना सुनिश्चित करे।”
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