विकलांग एथलीटों को देखकर मिली प्रेरणा : दीप ग्रेस

नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय महिला हॉकी टीम में अनुभवी डिफेंडर की भूमिका निभाने वाली ओडिशा की दीप ग्रेस एक्का को विकलांग एथलीटों को बिना किसी परेशानी के खेलते देख आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

वेबसाइट ‘द ब्रिज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इसके साथ ही एक्का ने इस बात का खुलासा भी किया कि वह गोलकीपर बनना चाहती थीं।

इंडोनेशिया के जकार्ता में 18 अगस्त से शुरू होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में शामिल एक्का ने कहा, “मैं ओडिशा के एक छोटे से गांव सुंदरगढ़ की निवासी हूं और शुरुआती दिनों में मुझे हॉकी के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। स्कूल में मैं हर खेल में हिस्सा लेती थी और जीत के बाद पुरस्कार मिलने पर बहुत खुशी होती थी।”

इस दौरान हॉकी के लिए ट्रायल हुए और इसमें एक्का का चुनाव कर उन्हें सुंदरगढ़ में छात्रवास में भेज दिया गया। 2007 में वह भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में शामिल हो गईं और राज्य स्तर पर खेलना शुरू कर दिया। 16 साल की उम्र में उन्होंने सोनीपत में सीनियर नेशनल्स में हिस्सा लिया।

एक्का ने कहा कि साई केंद्र में वह अन्य खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के साथ रहती थीं। इसमें विकलांग एथलीट भी शामिल थे, जो शरीर के किसी एक अंग के न होने के बावजूद बिना किसी परेशानी के खेलते थे।

बकौल एक्का, “एक हाथ या एक पैर न होने के बावजूद उनका हौंसला कायम था और वह अपने लक्ष्यों को हासिल करने की ओर अग्रसर थे। भगवान की कृपा से हम सही सलामत हैं। मैं हमेशा खुद को कहती थी कि अगर वे इतनी अच्छी तरीके से खेल सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? मेरे लिए उन्हें खेलते देखना एक उत्साहनजक अनुभव था और इससे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।”

साल 2011 में एक्का ने राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लिया और इसके बाद इसी साल उनका चयन जूनियर राष्ट्रीय शिविर में हो गया। कई टूर्नामेंट खेलने के बाद वह वरिष्ठ शिविर में शामिल हो गईं और सीनियर टीम का हिस्सा बन गईं।

एक्का ने कहा, “मैंने डिफेंडर के रूप में करियर की शुरुआत की थी, लेकिन कहीं न कहीं मेरी इच्छा गोलकीपर बनने की थी। मेरा भाई मेरे साथ एक ही छात्रवास में था और वह गोलकीपर था। मेरे अंकल भी मेरे कोच थे, लेकिन उन्होंने मुझे गोलकीपर नहीं बनने दिया। इसलिए, मेरे पास कोई विकल्प नहीं था और मैंने डिफेंडर के रूप में ही खेलना जारी रखा।”

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493