लोकसभा में मानव तस्करी-रोधी विधेयक पेश

नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने गुरुवार को लोकसभा में मानव तस्करी-रोधी विधेयक पेश किया, जिसमें मानव तस्करी की शिकार महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास का प्रावधान है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने निचले सदन में चर्चा के लिए इस विधेयक को पेश किया और इसे नया कदम बताया।

मानव तस्करी (बचाव, सुरक्षा एवं पुनर्वास) विधेयक में इस तरह के मामलों की जांच के लिए राष्ट्रीय मानव तस्करी-रोधी ब्यूरो के गठन का भी प्रावधान है।

मेनका ने कहा, “मानव तस्करी सीमारहित अपराध है। कुछ चुनिंदा अपराधों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जब महिलाओं और बच्चों को सोने की तरह बेचा जाता हो तो हम चुप कैसे रह सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “इस अपराध से वर्षो से पीड़ित लाखों लोगों को सुरक्षा दिलाने के लिए आइए आज इस विधेयक को वास्तविकता बनाएं।”

मेनका ने सांसदों से इस विधेयक को पारित करने का आग्रह करते हुए कहा, “हम सभी पीड़ितों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की तस्करी के लिए जिम्मेदार हैं। आज हमारे पास एक मौका है, जिससे हम उन्हें उनके अधिकारों की गारंटी दे सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अपराधियों पर कार्रवाई होगी।”

इस विधेयक के तहत हर राज्य सरकार एक स्टेट नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेगा।

जिला स्तर पर मानव तस्करी-रोधी इकाइयों (एटीयू) का गठन होगा और राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तरों पर मानव तस्करी-रोधी राहत एवं पुनर्वास समितिय का गठन होगा।

इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सुरक्षा आवास भी स्थापित किए जाएंगे।

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