आत्महत्या के समाचारों से प्रभावित होते हैं कमजोर व्यक्ति

टोरंटो, 30 जुलाई (आईएएनएस)। पत्रकारों को आत्महत्या की खबरें प्रसारित करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि आत्महत्या के तरीकों सहित अन्य जानकारियों को हेडलाइन में डाला जाना कमजोर इच्छाशक्ति के लोगों को आत्मघाती कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है। हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है।

केनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल (सीएमएजे) में प्रकाशित शोध के अनुसार, मीडिया में आत्महत्या के मामले का विस्तृत वर्णन कमजोर इच्छाशक्ति के व्यक्ति को ऐसा ही कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है। इस लक्षण को आत्महत्या का संक्रमण (सुसाइड कंटेजियन) कहते हैं। हालांकि, कुछ ऐसी भी परिस्थितियां होती हैं जिसमें ऐसे वर्णन का सकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।

कनाडा, ऑस्ट्रिया और ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने आत्महत्या पर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हानिकारक और लाभदायक पक्षों के बीच संबंधों का परीक्षण किया।

उन्होंने टोरंटो मीडिया बाजार में 13 प्रमुख प्रकाशकों (द न्यूयार्क टाइम्स सहित) के लगभग 17,000 लेखों तथा यहां 2011 से 2014 के बीच आत्महत्याओं का अध्ययन किया।

अध्ययन समाचार प्रकाशित होने के सात दिन के अंदर मुख्य रूप से एक निश्चित प्रकार की रिपोर्टिग और आत्महत्या के बीच संबंध पता करने के लिए किया गया।

टोरंटो में 2011 से 2014 के बीच मुख्य रूप से आत्महत्या के 6,367 लेख प्रकाशित हुए तथा 947 आत्महत्या के मामले आए।

शोधकर्ता सिन्योर ने कहा, “यह अध्ययन जिम्मेदार रिपोर्टिग पर बल देता है तथा यह भी बताता है कि कुछ मीडिया खबरों में उपयोगी जानकारी भी मिलती है।”

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