नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। पद्मश्री पुरस्कार विजेता व शास्त्रीय नृत्यांगना गीता चन्द्रन का कहना है कि उनकी शागिर्द सौम्या लक्ष्मी नारायणन द्वारा पहली भारतनाट्यम प्रस्तुति एक गुरु के लिए अपने शिष्य से मिलने वाली सच्ची आदरांजलि है। गीता ने 1974 में ‘अरंगेत्रम’ से अपना सफर शुरू किया था।
नारायणन ने ‘अरंगेत्रम’ की प्रस्तुति शनिवार को यहां चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में दी।
नारायणन ने आईएएनएस से कहा, “जब वह छह साल की थी तबसे इस प्रारूप का प्रशिक्षण ले रही हैं।” उन्होंने कहा कि किसी भी नृत्यांगना की जिंदगी में अरंगेत्रम एक मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा, “ऐसा तब होता है, जब गुरु को लगता है कि उसका शिष्य लगातार दो घंटे तक प्रस्तुति कर सकता है। यह वास्तव में मेरे लिए एक विशेष दिन है।”
उन्होंने कहा कि चन्द्रन के साथ उनका रिश्ता उनके जीवन में एक मार्गदर्शक शक्ति की तरह रहा है, चाहे वह उनका नृत्य हो, अकादमिक इतिहास हो या कुछ और।
उन्होंने कहा, “वह सिर्फ एक शिक्षक से अधिक उनके लिए परिजन के रूप में रही हैं।”
उनकी प्रस्तुति पर टिप्पणी करते हुए चन्द्रन ने कहा, “यह एक सम्मान है और एक शिष्य से उनके गुरु को एक सच्ची आदरांजलि भी। नृत्य की भावना में उनका कौशल, सहनशक्ति और विसर्जन देखना एक उपहार है।”
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