नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाने की धमकी को दरकिनार करते हुए भारत और रूस ने लंबी दूरी तक सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 ट्रियंफ की आपूर्ति के सौदे को अंतिम रूप दे दिया। इससे भारतीय वायुसेना की हवाई रक्षा क्षमता को पर्याप्त बढ़ावा मिलेगा।
19वें भारत-रूस वार्षिक द्विपक्षीय शिखर बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 5.4 अरब डॉलर (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) का यह सौदा हुआ। दोनों नेताओं ने मीडिया के समक्ष अपने बयानों में हालांकि इसका कोई जिक्र नहीं किया। अमेरिका द्वारा भारत को इस सौदे को न करने का दवाब डालने से इसकी संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष सहयोग, रेलवे, परमाणु सहयोग, उर्वरक और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
मिसाइल करार का संकेत दोनों नेताओं की बैठक संपन्न होने के कुछ देर बाद दोनों पक्षों द्वारा जारी किए गए संयुक्त बयान से मिला है।
संयुक्त बयान के अनुसार, “सतह से लंबी दूरी तक हवा में वार करने वाली ‘एस-400 प्रणाली’ भारत को देने के समझौते का दोनों देशों ने स्वागत किया।”
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार का कानून प्रभावी होने के बाद ‘एस-400’ मिसाइल सौदे पर कई कयास लगाए जा रहे थे। अमेरिकी कानून – ‘प्रतिबंध अधिनियम के जरिए अमेरिका विरोधी देशों का सामना करना’ (सीएएटीएसए)- जनवरी में प्रभावी हो गया था। यह कानून रूस, ईरान और उत्तर कोरिया की रक्षा कंपनियों से व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाता है। वाशिंगटन ने अब तक भारत को कोई अपवाद मानने से इंकार किया है।
मीडिया को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत-रूस संबंध अद्वितीय हैं और राष्ट्रपति पुतिन ने व्यक्तिगत रूप से इसमें योगदान किया है।
उन्होंने कहा कि दोनों देश अफगानिस्तान, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), ब्रिक्स, जी-20, और एसियाई देशों में एक बहुध्रुवीय और बहुपक्षीय दुनिया के लिए काम करने के अतिरिक्त आतंकवाद के खिलाफ काम करने के लिए सहमत हुए हैं।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार की बैठक दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकृत रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा प्रदान करेगी और आज लिए गए निर्णयों से द्विपक्षीय सहयोग और दुनिया में शांति और स्थिरिता लाने में सहयोग मिलेगा।
वहीं पुतिन ने कहा कि दोनों देश दोस्ती के मजबूत रिश्ते से लंबे समय से साथ हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय एजेंडा के मुद्दों पर बात की।
रूस के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने हमेशा ही रूस के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता दी है, जो हमेशा से ही भारत की विकास गाथा का हिस्सा रहा है।
उन्होंने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी को एक बार फिर सितंबर 2019 में व्लादिवोस्तोक फोरम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हुए बेहद खुशी हो रही है।”
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों ने सैन्य प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और लाभ का पुराना इतिहास रहा है।
बयान के अनुसार, “दोनों देशों ने सैन्य प्रौद्योगिकी सहयोग की वर्तमान परियोजनाओं की उल्लेखनीय प्रगति पर संतोष प्रकट किया और उन्होंने दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीकी उपकरणों के संयुक्त अनुसंधान और संयुक्त उत्पादन की सकारात्मक गति को स्वीकार किया।”
बयान के अनुसार, “भारत की मेक इन इंडिया नीति को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण घटक के तौर पर दोनों देशों ने सैन्य औद्योगिक सम्मेलन प्रक्रिया का उच्च रूप से मूल्यांकन किया।”
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