सबरीमाला, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच बुधवार को आंध्र प्रदेश की एक महिला व उसके परिवार को भगवान अयप्पा मंदिर की यात्रा बीच में छोड़कर वापस जाने को मजबूर होना पड़ा।
10 से 50 आयु वर्ष की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत देने वाले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का कुछ संगठन द्वारा विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण आंध्र प्रदेश की एक 40 वर्षीय महिला माधवी व उसके परिवार को मजबूरन भगवान अयप्पा के दर्शन किए बिना लौटना पड़ा।
माधवी ने माता-पिता व बच्चों के साथ अपनी यात्रा स्वामी अयप्पा मंदिर को मासिक पूजा अनुष्ठान के लिए खोले जाने से कुछ घंटे पहले शुरू की थी।
कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच दस मिनट की यात्रा के बाद जब परिवार मंदिर परिसर के अंदर पहुंचा तो माधवी सहित पूरे परिवार की यात्रा में बाधाओं डाली गईं और उन्हें भगवान अयप्पा के दर्शन की अपनी योजना रद्द करनी पड़ी। माध्वी 10 से 50 की वर्जित आयु वर्ग में आती हैं।
प्रदर्शनकारियों ने उनके मार्ग में हर संभव बाधा पहुंचाने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस बल के साथ माध्वी व उनके परिवार ने निलक्कल व पंबा की यात्रा पूरी की।
माधवी के साथ चल रहे पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया कि अगर वह आगे बढ़ना चाहती हैं तो वे उनके साथ है। लेकिन गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने उनका पीछा जारी रखा और आखिरकार माध्वी ने लौटने का निर्णय किया।
बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के 28 सितंबर के आदेश के बाद मंदिर का दरवाजा पहली बार 10 से 50 साल की महिलाओं के लिए खोला जा रहा है।
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