उप्र : दुरेंडी में थम नहीं रहा बालू का अवैध खनन

बांदा, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के मुखिया भले ही बालू के अवैध खनन पर रोक लगाने के दावे कर रहे हों, लेकिन बांदा जिले में यह गोरखधंधा किस कदर फल-फूल रहा है, इसकी बानगी जिला मुख्यालय से चंद कदम दूर दुरेंडी में कभी भी देखी जा सकती है। यहां अधिकारियों की नाक के नीचे दर्जनभर प्रतिबंधित मशीनों से केन नदी का सीना बेखौफ चीरा जा रहा है।

बांदा, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के मुखिया भले ही बालू के अवैध खनन पर रोक लगाने के दावे कर रहे हों, लेकिन बांदा जिले में यह गोरखधंधा किस कदर फल-फूल रहा है, इसकी बानगी जिला मुख्यालय से चंद कदम दूर दुरेंडी में कभी भी देखी जा सकती है। यहां अधिकारियों की नाक के नीचे दर्जनभर प्रतिबंधित मशीनों से केन नदी का सीना बेखौफ चीरा जा रहा है।

जिला मुख्यालय बांदा से महज चार या पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित केन नदी की दुरेंड़़ी बालू खदान में बालू के अवैध खनन पर सिंचाई और जिले के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह की फटकार का भी असर नहीं हुआ। शुक्रवार को समीक्षा बैठक के दौरान जब यह मामला उठा, तब खदान में सिर्फ चार पोकलैंड मशीनें चल रही थीं, लेकिन मंत्री द्वारा अधिकारियों को फटकार लगाए जाने के बाद खनन तो नहीं बंद हुआ, अलबत्ता पट्टाधारक ने दो पोकलैंड मशीनें और नदी में उतार दी। मौजूदा समय में इस बालू खदान में छह पोकलैंड मशीनें नदी की बीच जलधारा में दिन-रात खनन कार्य में लगी हैं।

बांदा के खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने सोमवार को बताया कि केन नदी में दुरेंडी बालू खदान के गाटा संख्या-678, 680ख, 681ख, 682, 677क, 683ख और 676 में कुल रकबा-24 हेक्टेअर क्षेत्र का पट्टा आशीष इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, झांसी के नाम पांच साल का पट्टा किया गया है, जिसमें नियमानुसार खनन करने की अनुमति है।

मशीनों से बालू खनन किए जाने के सवाल पर खनिज अधिकारी ने बताया कि ‘वन और पर्यावरण विभाग से पट्टाधारक ने अनुमति ले रखी है, जबकि इसके पूर्व बांदा में खनिज अधिकारी के पद पर तैनात रहे हवलदार सिंह यादव बताते हैं कि भारत सरकार का कोई भी विभाग मशीनों के माध्यम से जलधारा में खनन की इजाजत नहीं देता। सिर्फ खदान तक रास्ता बनाने के लिए ही मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि खदान तक वाहनों के आने और जाने का रास्ता भी एक ही होगा। गाइडलाइन के अनुसार, दूसरी रास्ता बनाना या जलधारा में मशीन से खनन करना, स्थायी या अस्थायी पुल बनाना भी अपराध है।

जिलाधिकारी का सरकारी मोबाइल नंबर (9554417531) स्विच ऑफ होने पर जब अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संतोष बहादुर सिंह से इस संबंध में जानकारी चाही गई तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा, “मैं अभी जिलाधिकारी द्वारा बुलाई गई बैठक में जा रहा हूं, बाद में फिर कभी बात करिएगा।”

कुल मिलाकर महज चार या पांच किलोमीटर की दूरी में एक अक्टूबर से दोबारा संचालित इस बालू खदान की जांच-पड़ताल करने की जरूरत किसी अधिकारी ने नहीं समझी, जबकि बांदा मुख्यालय में मंडलस्तरीय दर्जनभर वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं।

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