टोक्यो, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जापान के कारोबारियों को भारत में अधिक से अधिक निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।
मोदी ने व्यापार मंच शिखर सम्मेलन में कारोबारियों से बातचीत के दौरान कहा, “मैं हमेशा ‘मजबूत भारत मजबूत जापान’ के बारे में बात करता हूं। इस मौके पर जापानी व्यापारियों के भारत में विश्वास दिखाने के लिए मैं उनके प्रति आभार प्रकट करता हूं। मैं आप सभी को निवेश प्रक्रिया को तेज करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित करता हूं।”
प्रधानमंत्री ने भारत में विनिर्माण की कम कीमत को व्यापार के लिए सबसे प्रमुख फायदा बताया।
व्यापार में आसानी को लेकर अपनी सरकार के प्रयासों के बारे में उन्होंने कहा, “भारत ने अपने 26 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की व्यापार करने में आसानी के आधार पर रैंकिंग करनी शुरू की है। इसके परिणामस्वरूप उनमें निवेश के लिए एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू हुई है।”
औद्योगिक प्रगति पर मोदी ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिग्स (आईओटी) व 3डी प्रिंटिंग व रोबोटिक्स जैसी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में खोज की वजह से तेजी से ‘इंडस्ट्री 4.0’ की तरफ बढ़ रहा है।
अपनी सरकार के बीते चार सालों की उपलब्धियां गिनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार ‘भारतीय समाधान-वैश्विक उपयोग’ की भावना के साथ काम कर रहा है।
मोदी अपने जापानी समकक्ष शिंजो आबे के साथ द्विपक्षीय वार्षिक शिखर बैठक के लिए शनिवार को यहां पहुंचे।
मोदी ने कहा, “कुछ साल पहले मैंने भारत में एक मिनी जापान बनाने की बात कही थी। यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात है कि आज आप बड़ी संख्या में भारत में काम कर रहे हैं।”
मोदी ने कहा, “जापान के भारत के साथ सहयोग की वजह से हमारी दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना आगे बढ़ रही है।”
मोदी ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल विनिर्माण में एक वैश्विक केंद्र बना रहा है।
मोदी ने कहा, “मैंने हमेशा से व्यापार करने में सहजता को अपनी प्राथमिकता में रखा है। जब हमने 2014 में सरकार की जिम्मेदारी संभाली थी तो विश्व बैंक ने भारत को व्यापार करने में सहजता की रैंकिंग में 140वां स्थान दिया था। अब भारत 100वें स्थान पर पहुंच चुका है और हम बेहतर रैंकिंग बनाने के लिए काम कर रहे हैं।”
मोदी ने न्यू इंडिया के निर्माण में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में जापानी योगदान पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि भारत व जापान के बीच इलेक्ट्रिक गतिशीलता क्षेत्र में समन्वय से दोनों देशों को फायदा होगा।
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