नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वीजा कार्ड, रुपेकार्ड, मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों पर डाटा लोकलाइजेशन की शर्ते नहीं थोपने की मांग की है।
व्यापारी संगठन ने डाटा लोकलाइजेशन को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पहल का स्वागत किया है, लेकिन संगठन का कहना है कि सरकार को डाटा का पूर्ण विवरण और आंशिक विवरण रखने वाली कंपनियों के लिए एक समान शर्ते नहीं थोपनी चाहिए।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को इस संबंध में एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि बड़ी मात्रा में विभिन्न प्रकार की कंपनियां बैंक एवं अन्य संस्थान अनेक कारणों से भारतीय नागरिकों से डाटा एकत्र करते हैं। लिहाजा उनके बीच स्पष्ट अंतर रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्म जैसे- फेसबुक, गूगल, अमेजन और बैंकों के पास लोगों का पूरा डाटा रहता है, जिसमें नाम, पता फोन नंबर, संपर्क विवरण आदि शामिल है। उन्होनें कहा कि इस प्रकार के डाटा निश्चित रूप से देश में ही संरक्षित हों ताकि उनका दुरुपयोग न हो।
उन्होंने कहा, “लेकिन वीजाकार्ड, रुपेकार्ड, मास्टरकार्ड जैसी केवल टेक्नोलॉजी देने वाली कंपनियां, जिनके पास केवल 16 अंकों का डिजिटल कार्ड नंबर होता है, ऐसी कंपनियों को डाटा भारत में रखने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसका अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन और व्यापार पर विपरीत असर पड़ सकता है।”
कैट ने सरकार और रिजर्व बैंक के इस कदम की सराहना कर समर्थन देते हुए कहा कि इस कदम से डाटा संरक्षण का ढांचा मजबूत होगा और भारतीय नागरिकों के डाटा के गलत इस्तेमाल की संभावनाएं भी न के बराबर होंगी तथा साथ ही भारत एक डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत से उभरेगा।
कैट ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र की प्रति रिजर्व बैंक के गवर्नर के अलावा, वित्तमंत्री अरुण जेटली, आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी भेजी है।
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