सत्यरूप 5 ज्वालामुखी पर्वतों की चढ़ाई पूरी करने वाले पहले भारतीय बने

नई दिल्ली, 10 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय पर्वतारोही सत्यरूप सिद्धांत पापुआ न्यू गिनी के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत शिखर ‘माउंट गिलुवे’ की चढ़ाई करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।

सत्यरूप शुक्रवार को पापुआ न्यू गिनी में 4,367 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचे। वह अब तक सात में से पांच ज्वालामुखी शिखरों की सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुके हैं और वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।

इसके अलावा वह माउंट सिडले की चढ़ाई पूरी करने वाले पहले भारतीय हैं। अगर वह इसे जनवरी में पूरी करने में कामयाब हो जाते हैं तो वह सात पर्वत शिखरों और सात ज्वालामुखी पर्वतों की चढ़ाई वाले पहले भारतीय होंगे।

सत्यरूप ने न केवल माउंट एवरेस्ट को फतह किया, बल्कि वह दक्षिणी ध्रुव के अंतिम छोर तक भी पहुंचे। उन्होंने 50 किलो का स्लेज लेकर छह दिन में 111 किमी की यात्रा पूरी की।

पश्चिम बंगाल के सत्यरूप ने चढ़ाई पूरी करने के बाद कहा, “माउंट गिलुवे की सफलतापूर्वक चढ़ाई करने के बाद मैं काफी खुश हूं। मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता कि जब मैं सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर पहुंचा तो मैं टॉप ऑफ द वल्र्ड महसूस कर रहा था। मेरा अगला लक्ष्य माउंट विल्हम है और मैं पर्वत शिखर की चढ़ाई पूरी करने के प्रति प्रतिबद्ध हूं।”

सत्यरूप दिसंबर में छठे ज्वालामुखी पर्वत मैक्सिको के माउंट पीको डी ओरिजाबा की चढ़ाई शुरू करेंगे और उसके बाद वह माउंट सिडले की चढ़ाई के लिए अंटार्कटिका जाएंगे।

सत्यरूप और मौसमी खाटुआ इस साल सितंबर में एशिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत माउंट दामावंद पर तिरंगा फहराने में कामयाब रहे हैं। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले बंगाली हैं। माउंट दामावंद ईरान में सबसे ऊंचा ज्वालामुखी पर्वत है और संभावित रूप से सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है।

कॉलेज के दिनों तक अस्थमा से पीड़ित रहे सत्यरूप को इस उलब्धि तक पहुंचने के लिए मणिपाल ग्रुप और टाटा ट्रस्ट के अलावा दोस्तों और प्राइवेट फर्म से सहयोग मिल रहा है।

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