नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस) । देश के अग्रणी प्रबंधन संस्थानों में से एक आईएमटी गाजियाबाद के दो प्रतिभाशाली प्रबंधन छात्रों को कम लागत वाले कचरा प्रबंधन समाधान के लिए पेप्पीको के ‘चेंज द गेम’ चैलेंज का विजेता घोषित किया गया।
पेप्सीको ने दो होनहार प्रबंधन छात्रों- तुषार विश्नोई और उत्कर्ष गर्ग को प्लास्टिक पैकेजिंग और पुनर्चक्रण हेतु नवीन व्यावसायिक विचारों को साझा करने के लिए 100,000 डॉलर का अनुदान भी देने घोषणा की है। साथ ही साथ तुषार और उत्कर्ष को पेप्सिको इंडिया में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपना करियर शुरू करने का भी मौका मिला है।
पेप्सीको के ‘ चेंज द गेम ‘ चैलेंज के तहत युवा प्रबंधन छात्रों को टिकाऊ प्लास्टिक पैकेजिंग और पुनर्चक्रण के लिए नवीन व्यावसायिक विचारों को साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। पेप्सीको के ‘चेंज द गेम पहल, यह इसका तीसरा संस्करण है। यह पहल युवा प्रतिभाओं को कंपनी के साथ काम करने के साथ-साथ वास्तविक जीवन की समस्याओं के रचनात्मक समाधान के लिए एक मंच प्रदान करता है।
इस पहल ने भारत के शीर्ष बी-स्कूलों के 11,000 छात्रों को एक मंच प्रदान किया, जहां इन्होंने स्थिरता के लिए समाधान पेश करके दुनिया को एक बेहतर स्थल बनाने के लिए अपना दिमाग लगाया। पेप्सीको के ‘चेंज द गेम’ चैलेंज के तीसरे संस्करण के तहत छात्रों को प्रतिस्पर्धा के लिए दुबई बुलाया गया था और तुषार तथा उत्कर्ष वहीं इस चैलेंज के क्षेत्रीय विजेता चुने गए।
इस पहल के संबंध में पेप्सीको इंडिया की मानव संसाधन उपाध्यक्ष (इंडिया रीजन) सुचित्रा राजेंद्र ने कहा, ”’चेंज द गेम’ चैलेंज का उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं को वास्तविक मुद्दों के लिए स्थायी और कारगर समाधान पेश करने के लिए आमंत्रित करना है। मुझे बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि गहन चयन प्रक्रिया के बाद आइएमटी गाजि़याबाद की टीम में शामिल तुषार विश्नोई और उत्कर्ष गर्ग को विजेता घोषित किया गया। पेप्सीको इंडिया इन्हें मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपने साथ जोड़ता है और इसके अलावा अपने विचार को जीवंत करने के लिए इन्हें एक लाख डालर का फंड प्रदान किया जा रहा है।”
उत्कर्ष और तुषार ने एक कम लागत वाला कचरा प्रबंधन समाधान देना का विचार प्रकट किया। यह समाधान एक उपकरण इकाई है जो प्रति वर्ष 18 टन प्लास्टिक कचरे से निपटने में सक्षम है। उत्कर्ष और तुषार द्वारा पेश समाधान न सिर्फ व्यवहारिक है बल्कि यह पेप्सीको की 2025 सस्टेनेब्लिटी एजेंडा के अनुरूप भी है।
अपनी उपलब्धि को लेकर तुषार और उत्कर्ष ने कहा, “हम अपनी परियोजना को जीवन में लाने के लिए एक लाख डालर का अनुदान पाकर खुश हैं। हमें इसके लिए काफी मेहनत करना है। इस परियोजना को गहन अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता है। इसके कार्यान्वयन के लिए हमें पहले आर एंड डी टीम के साथ गहन तकनीकों का अध्ययन करना होगा। इसके बाद ही हम सरकारी दिशानिदेशरें के अनुरूप एक एसा उपकरण तैयार कर सकेंगे, जो कि एक कम लागत वाला उत्कृष्ठ कचरा प्रबंधन समाधान साबित होगा।”
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