मायावती ने दिया संकेत, वह भी प्रधानमंत्री पद की दावेदार

विशाखापत्तनम, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने बुधवार को संकेत दिया कि वह भी प्रधानमंत्री पद की दावेदार हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

शीर्ष पद के लिए उनकी दावेदारी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “जहां तक मेरे प्रधानमंत्री बनने का सवाल है तो चुनाव अभी चल रहा है। जब नतीजे आएंगे, तब स्थिति साफ हो जाएगी।”

मायावती आंध्र प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए अपने गठबंधन साझेदार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेताओं और पवन कल्याण के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।

भाजपा और कांग्रेस दोनों के विकल्प के रूप में तीसरे मोर्चे के गठन की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि नतीजों के बाद ही वह इसपर टिप्पणी करेंगी।

उन्होंने दावा किया कि लोग केंद्र में बदलाव चाहते हैं, क्योंकि कांग्रेस ने लंबे अरसे तक शासन किया, लेकिन वह वादों को निभाने में विफल रही। जबकि भाजपा 2014 में किए अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही और अपनी विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास करती रही।

उन्होंने कहा, “अगर हमें केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिलता है तो हम उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सुशासन देंगे। हम सभी वर्गो में गरीबों के कल्याण के लिए काम करेंगे, बेरोजगारी की समस्या का समाधान करेंगे और किसी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।”

मायावती ने कहा, “अगर हम केंद्र में सरकार बनाते हैं तो हम आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा देंगे, जिसे कांग्रेस और भाजपा दोनों ही देने में विफल रहीं।”

बसपा को 2014 चुनाव में वोटों के लिहाज से देश में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को हर राज्य में वोट मिले थे। जहां भी हमारा गठबंधन है, उससे भाजपा को नुकसान होगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि आंध्र प्रदेश में उनका गठबंधन सत्ता में आएगा और पवन कल्याण मुख्यमंत्री बनेंगे, क्योंकि लोगों ने राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों को परख लिया है।

अभिनेता से राजनेता बने पवन कल्याण ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश का दौरा किया और वह मायावती द्वारा किए कार्यो से काफी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह मायावती को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर एक चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है और अगर एक चौकीदार प्रधानमंत्री के रूप में फिर से आना चाहता है तो हम एकमात्र महिला व सामाजिक मकसद के लिए लड़ने वाली अकेली योद्धा को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। उन्होंने सभी कठनाइयों के बीच संघर्ष और कड़ी चुनौतियों का सामना किया है।”

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