विश्व नृत्य दिवस नृत्य साधकों की एकता का प्रतीक है : गीता चंद्रन

नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भरतनाट्यम की माहिर नृत्यांगना और 2007 में पद्मश्री चुनी जाने वाली गीता चंद्रन मानती हैं कि विश्व नृत्य दिवस देश और दुनिया भर के तमाम नृत्य साधकों के लिए एकता का प्रतीक जैसा है।

नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भरतनाट्यम की माहिर नृत्यांगना और 2007 में पद्मश्री चुनी जाने वाली गीता चंद्रन मानती हैं कि विश्व नृत्य दिवस देश और दुनिया भर के तमाम नृत्य साधकों के लिए एकता का प्रतीक जैसा है।

पांच साल की उम्र में भरतनाट्यम शुरू करने वाली चंद्रन का नृत्य संगठन-नाट्य वृक्ष रविवार को विश्व नृत्य दिवस मना रहा है और इस दौरान लेक्चर, वर्कशॉप और पाठ का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में होगा।

साल 2016 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जीत चुकीं गीता मानती हैं कि यूनेस्को ने साल 1982 में ही दुनिया भर में विश्व नृत्य दिवस मनाने की घोषणा कर दी थी लेकिन अब तक इसे लेकर भारत में क्रांति नहीं आ पाई है।

चंद्रन ने कहा, “मेरे लिए इस दिन का मतलब यह है कि मैं युवा नृत्य साधकों से कहूं कि वे अकेले या अकेली नहीं हैं। उनकी तरह एक बड़ा नृत्य समुदाय है जो बदलाव और पुर्नसरचना के दौर से गुजर रहा है।”

चंद्रन मानती हैं कि नृत्य इन दिनों एक कठिन साधना बन चुका है। बकौल चंद्रन, “नृत्य काफी एकाकी यात्रा बनता जा रहा है है क्योंकि यह काफी लम्बा चलता है और इसमें पैसे की कमी भी दिखने लगी है। इसमें कई तरह की वित्तीय असुरक्षा है और इस कारण आज कल इस विधा में अधिक युवा नहीं आ रहे हैं लेकिन मैं भविष्य को लेकर आशान्वित हूं।”

अपनी गुरु स्वर्ण सरस्वती के बारे में चंद्रन ने कहा कि उन्होंने उनके अंदर संगीत, दर्शन और रस का समावेश किया।

चंद्रन ने कहा कि आज का समय क्लासिकल डांस के लिए उदयकाल है। बकौल चंद्रन, “युवा नृत्य साधक नए-नए विचारों के साथ सामने आ रहे हैं और इससे मैं मानती हूं कि यह भारतीय पारंपरिक नृत्य के लिए उदयकाल है।”

चंद्रन ने खुद को उन कलाकारों में नहीं रखा, जिन्होंने भाजपा सरकार को फिर से सत्ता में लाने के लिए लोगों से मतदान करने की अपील की। चंद्रन ने कहा, “एक कलाकार होने के नाते हमें मुद्दों से जुड़ना चाहिए, न कि राजनीतिक पार्टियों या फिर उनके एजेंडे से।”

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