हिन्दू शासकों ने हिंसा से परहेज नहीं किया : येचुरी

भोपाल, 3 मई (आईएएनएस)। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने शुक्रवार को यहां कहा कि हिंदू शासकों को भी हिंसा से परहेज नहीं रहा है, और यह कहना गलत है कि हिंदू हिंसक नहीं हो सकता।

यहां गांधी भवन में गुरुवार देर शाम आयोजित एक परिचर्चा में येचुरी ने कहा, “यह कहना अनुचित है कि हिन्दू कोई हिंसा नहीं कर सकता, जबकि हमारे महाकाव्यों से लेकर इतिहास तक में ढेरों उदाहरण हैं जो यह बताते हैं कि हिन्दू शासकों को भी हिंसा से कोई परहेज न रहा है। लेकिन ऐसा कह कर यह सिद्ध करने का प्रयास किया जाता है कि जो दूसरे धर्म के लोग हैं, वे हिंसक हैं।”

परिचर्चा का विषय था -‘संसदीय प्रणाली : चुनाव और जनतंत्र’। सांस्कृतिक मोर्चा, सीटू, जनवादी महिला समिति, एसएफआई और भारत के लिए जनमंच भोपाल की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित परिचर्चा में येचुरी ने आरएसएस पर हमला करते हुए कहा, “संघ ने अपने आरंभिक काल से ही सेना का हिन्दूकरण और हिन्दुओं के सैन्यीकरण का लक्ष्य बनाकर काम शुरू किया, जो इटली में मुसोलिनी द्वारा स्थापित मॉडल पर आधारित था। आज उसी सोच की परिणति प्रज्ञा ठाकुर और असीमानंद जैसे लोग हैं।”

येचुरी ने कहा, “देश के तमाम हिस्सों में आयोजित हो चुके तीन चरणों के मतदान में हार का संकेत देख कर भाजपा ने बाकी के चार चरणों के लिए पार्टी में शामिल किया और भोपाल से प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाकर चुनाव में मुद्दों की दिशा बदलने का प्रयास किया है। वे लंबे समय से इस कोशिश में थे कि लोगों को साम्प्रदायिक तौर पर बांट कर वोट एकत्रित किए जाएं। युद्धोन्माद पैदा करते हुए बार-बार मोदी जी ने यह दावा किया कि हम पृथ्वी और अंतरिक्ष के चौकीदार हैं, इसलिए लोगों को अब कहना है कि मोदी जी आप जाइए और अंतरिक्ष की ही चौकीदारी कीजिए।”

येचुरी ने बीते पांच सालों में आतंकी घटनाएं बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा, “देश में कश्मीर के साथ-साथ और भी हिस्सों में आतंकी हमले हुए, जिनमें अभी हाल का नक्सली हमला भी शामिल है। ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि देश सुरक्षित हाथों में है। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान तक ने कहा कि हम चाहते हैं कि मोदी पुन: प्रधानमंत्री बनें। इसके क्या मायने हैं?”

परिचर्चा में भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी अपनी बात रखी। परिचर्चा की अध्यक्षता अर्थशास्त्री डॉ. एच. एस. यादव ने की।

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