राजीव पर प्रधानमंत्री का हमला कांग्रेसियों द्वारा किए गए अपमान की ‘प्रतिक्रिया’ : गडकरी

नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमले को उस अपमान की प्रतिक्रिया बताया है, जो कांग्रेसियों ने उनके साथ किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमले को उस अपमान की प्रतिक्रिया बताया है, जो कांग्रेसियों ने उनके साथ किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

प्रधानमंत्री को ‘चोर’ कहने पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए, उन्होंने कहा कि यह ‘बहुत दुर्भाग्यपूर्ण’ है कि ऐसी भाषा का प्रयोग प्रधानमंत्री का पद संभाल रहे व्यक्ति के लिए किया गया।

आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा के प्रयोग से देश की ‘खराब छवि’ बनती है, खासकर तब जब पूरा विश्व सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव को करीब से देख रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा, “प्रधानमंत्री केवल भाजपा के प्रधानमंत्री नहीं हैं। वे देश के प्रधानमंत्री हैं। यह सभी राजनीतिक पार्टियों और देश के लोगों का कर्तव्य है कि जो भी इस पद को संभाले, उनका सम्मान करें।”

पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “प्रधानमंत्री को ‘चोर’ कहना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि विचार में अंतर हो सकते हैं, जोकि समझने योग्य है लेकिन खराब भाषा का प्रयोग लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।

सड़क परिवहन, राजमार्ग, जहाजरानी और जल संसाधन मंत्री ने कहा, “मतभेद होना चाहिए, मनभेद नहीं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर एक’ कहा था। कई लोगों का मानना था कि यह बयान उनके पद की मर्यादा के खिलाफ था।

इसपर उन्होंने कहा, “यह क्रिया और प्रतिक्रिया है। जब कोई एक शब्द का प्रयोग कर रहा है, तो अन्य व्यक्ति से भी उसी भाषा में बात करने की उम्मीद की जाती है।”

उन्होंने कहा कि हमें ‘कौन जिम्मेदार है’ से आगे बढ़ने की जरूरत है और यह लोकतंत्र में सभी के लिए सोचने का वक्त है कि कैसे माहौल को अच्छा किया जाए।

गडकरी ने गुरुवार को कहा था कि प्रधानमंत्री को ’56 बार गालियां’ दी गई, जिसपर उनसे पूछा गया कि क्या वह मोदी के राजीव गांधी के विरुद्ध ‘भ्रष्टाचारी नंबर एक’ के बयान को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जिस तरह से प्रधानमंत्री का 56 बार अपमान किया गया, क्या यह देश के लिए सही है? वह देश के प्रधानमंत्री हैं..इस तरह का बयान देश के लिए अच्छा नहीं है।”

मंत्री ने कहा कि यह सही नहीं है कि दलों के बीच ‘कड़े शब्दों’ का आदान-प्रदान हो।

उन्होंने कहा कि ‘मौजूदा सरकार की नीतियों, कार्यक्र्मो और प्रदर्शन’ को लेकर राजनीतिक लड़ाई होनी चाहिए और भविष्य को लेकर विपक्ष किस प्रकार का दृष्टिकोण दे सकता है, इस तरह की चर्चा से लोकतंत्र का पूरा परिदृश्य बदल सकता है।”

गडकरी ने कहा, “पूरी दुनिया भारत में हो रहे घटनाक्रम को देख रही है। जिस तरह से राजनीतिक पार्टियों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान हो रहा है, इससे देश की खराब छवि बन रही है। यह देश के लिए समय है कि हम यह सोचें कि कैसे प्रणाली में गुणात्मक सुधार लाया जाए।”

उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के चार स्तंभों-न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया को यह देखना चाहिए कि कैसे ‘राजनीतिक जीवन में गुणवत्ता को बढ़ाया जाए और कैसे हम मूल्यवान परिवर्तन कर सकते हैं, जो कि लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हो।’

गडकरी ने कहा कि राजनीतिक बहसों में नकारात्मकता फैलाने में भी मीडिया का अहम योगदान है।

उन्होंने कहा, “हम मेरठ और दिल्ली के बीच एक बढ़िया एक्सप्रेसवे बना रहे हैं। कोई भी इस बारे में या अच्छी चीजों को लिखने के लिए तैयार नहीं है। नकारात्मकता और विरोधाभाष को मीडिया बहुत पसंद करती है। वे हमेशा इसमें फ्लेवर मिलाना चाहते हैं। यह अच्छा नहीं है।”

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