कारगिल युद्ध के दिग्गज असम में बंदी शिविर से रिहा

गुवाहाटी, 8 जून (आईएएनएस)। गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के एक दिन बाद कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके सेवानिवृत्त सैनिक मोहम्मद सनाउल्लाह को शनिवार को राज्य के गोलपारा जिले में एक बंदी शिविर से रिहा कर दिया गया।

पिछले महीने असम में सेना के सेवानिवृत्त कैप्टन को असम पुलिस की सीमा शाखा ने विदेशी नागरिकों के संबंधित एक न्यायाधिकरण द्वारा ‘विदेशी’ घोषित किए जाने के बाद हिरासत में ले लिया था और उन्हें पश्चिमी असम के गोलपारा जिले के एक बंदी शिविर में रखा गया था।

शुक्रवार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने सनाउल्ला को उनके वकील इंदिरा जयसिंह और कई अन्य लोगों की दलीलें सुनने के बाद जमानत दे दी।

हालांकि, अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वह सीमा पुलिस को सूचित किए बिना कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के अधिकार क्षेत्र को छोड़कर न जाएं।

न्यायमूर्ति मनोजित भुइयां और न्यायमूर्ति पी. के. डेका ने इस मामले में भारत सरकार, असम सरकार, रक्षा मंत्रालय, असम पुलिस के जांच अधिकारी और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया।

असम के कामरूप जिले में बोको के तहत आने वाले कलहिकाश गांव के निवासी सनाउल्ला का जन्म 1967 में हुआ था और 1987 में वह भारतीय सेना में शामिल हुए थे।

उन्होंने 2017 में मानद कैप्टन के रूप में सेवानिवृत्त होने से पहले 30 वर्षो तक सेना में रहकर देश की सेवा की।

उन्हें 2014 में भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) के रूप में नियुक्त होने पर राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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