(खुसुर-फुसुर): कहने को तो कयास लगता है क्योंकि यह कई दफे लिखा जा चुका है लेकिन अब जो राजनैतिक बयार बहने लगी हैं उनमें खास अय्यारों की खबरों पर भरोसा करना पड़ रहा है,अय्यार राजनैतिक गलियारों में खुसुर-पुसुर कर रहे हैं ,भाजपा कार्यालय में नए मुख्यमंत्री की बाट जोही जाने लगी है,वहीं भाजपा की वर्तमान राजनैतिक कार्यविधि से किसी का नाम पक्का तय करने में पत्रकारों को पसीना आ रहा है कोई महाकौशल का नाम ले रहा ,कोई कहता दाढ़ी वाले दबंग बनेंगे कोई कहता हमारे मुन्ना भैया का नाम तय है अब किसका नाम सामने आएगा यह तो पितृ-पक्ष निकलने के बाद ही पता चलेगा लेकिन यह तय है कि शिवराज सिंह को सब पता है और वे अपनी अंतिम पारी के अंतिम स्लाग ओवरों में जम कर चौके-छक्के लगा रहे हैं ,कहीं न कहीं दुखी भी हैं और अपनी कुंडली के राजयोग पर भरोसा भी है ,पीछे हरियाली तंत्र भी है लेकिन भाजपा कार्यालय में फैला नवाचार बताता है कि अब खेला हो कर रहेगा,पांसे गुठियाने वाले चेहरों से हंसी गायब है आती भी है तो खींचि सी ,खीझी हुई,चुनावों की पारी के लिए नए उम्मीदवार को भी समय देना ही होगा ,सब – कुछ अनूकूल रहा तो नया मुख्यमन्त्री पितृ-पक्ष समाप्त होते या उप-चुनाव समाप्ति के बाद मप्र को मिल सकता है …….बाकी शिवराज सिंह चौहान की कुंडली के ग्रह-नक्षत्र जानें
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