नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष सुमन बेरी:एक परिचय

नई दिल्ली– देश में नीति निर्माण की अग्रणी संस्था डॉ. राजीव कुमार ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। लगभग 5 साल तक वह इस पद पर रहे। अब उनकी जगह डॉ. सुमन के बेरी को नीति आयोग के उपाध्यक्ष होंगे। 1 मई को वे अपना पदभाग ग्रहण करेंगे। सुमन बेरी दून स्कूल देहरादून के छात्र रह चुके हैं। कौन हैं नीति आयोग के वीसी सुमन बेरी? नीति आयोग उपाध्यक्ष पद पर राजीव कुमार का स्थान लेने वाले सुमन बेरी एक जानेमाने अर्थशास्त्री हैं। वह वर्ल्ड बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट रह चुके हैं। सुमन बेरी नई दिल्ली स्थित नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च के 2001 से 2011 तक पूर्व डायरेक्टर जनरल भी रह चुके हैं। अजीत सुमन बेरी फिलहाल बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स में एक इकनॉमिक थिंकटैंक के नॉन रेजिडेंट फेलो के पद पर है। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन और प्रिंसंटन यूनिवर्सिटी से मास्टर की डिग्री ली है। सुमन बेरी ने अपने करियर की शुरुआत वर्ल्ड बैंक के साथ की थी। उन्होंने करीब 28 साल तक सेवाएं दी और उसके चीफ इकोनॉमिस्ट बने। नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने से पहले वह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद और भारत के सांख्यिकीय आयोग से लेकर मॉनिटरी पॉलिसी और आरबीआई की बनी तकनीकी सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं। बता दें कि राजीव कुमार नीति आयोगके दूसरे उपाध्यक्ष थे। 2014 में पहली बार सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया था। इसके बाद अरविंद पनगढ़िया नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष बने। पनगढ़िया के इस्तीफा देने के बाद राजीव कुमार 1 सितंबर 2017 को नए उपाध्यक्ष बने थे। अफगानिस्तान में जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद में ब्लास्ट, 33 की मौत, 43 घायल क्या है नीति आयोग नीति आयोग देश की नीति निर्धारक संस्था है। इससे पहले इसका नाम योजना आयोगथा। मोदी सरकार ने योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया। यह आयोग देश के लिए प्रमुख नीति के निर्धारण का काम करती है। (जनता की पत्रकारिता करते हुए जनज्वार लगातार निष्पक्ष और निर्भीक रह सका है तो इसका सारा श्रेय जनज्वार के पाठकों और दर्शकों को ही जाता है। हम उन मुद्दों की पड़ताल करते हैं जिनसे मुख्यधारा का मीडिया अक्सर मुँह चुराता दिखाई देता है। हम उन कहानियों को पाठक के सामने ले कर आते हैं जिन्हें खोजने और प्रस्तुत करने में समय लगाना पड़ता है, संसाधन जुटाने पड़ते हैं और साहस दिखाना पड़ता है क्योंकि तथ्यों से अपने पाठकों और व्यापक समाज को रू-ब-रू कराने के लिए हम कटिबद्ध हैं।

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