रोहिंग्या डिटेंशन केंद्र को लेकर आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा- जानकारी गोपनीय

नई दिल्ली: ट्विटर पर गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली सरकार को राजधानी में मौजूद रोहिंग्याओं की ‘मौजूदा रिहाइश को ‘डिटेंशन केंद्र’ घोषित करने का निर्देश देने के दो महीने बाद मंत्रालय ने इस बारे में सूचना का अधिकार (आटीआई) आवेदन के जवाब में इस बारे में कोई जानकारी साझा करने से इनकार किया है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने कहा है कि यह जानकारी गोपनीय है.

ज्ञात हो कि 17 अगस्त 2022 को केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक ट्वीट में कहा था कि रोहिंग्या शरणार्थियों को बाहरी दिल्ली में स्थित बक्करवाला के अपार्टमेंट में भेजा जाएगा और उन्हें मूलभूत सुविधाएं तथा पुलिस सुरक्षा भी मुहैया की जाएगी.

हालांकि, सोशल मीडिया पर विश्व हिंदू परिषद समेत कई दक्षिणपंथी समूहों द्वारा इसकी आलोचना के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि उसने दिल्ली में रोहिंग्या मुसलमानों को ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट उपलब्ध कराने का कोई निर्देश नहीं दिया है.

साथ ही मंत्रालय ने अरविंद केजरीवाल सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि अवैध विदेशियों को उनके वर्तमान स्थान पर ही रखा जाए.

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा था कि ‘अवैध विदेशी रोहिंग्याओं’ को कानून के अनुसार उनके देश वापस भेजने तक डिटेंशन सेंटरों में रखा जाना चाहिए और दिल्ली सरकार को उनके ठहरने के वर्तमान स्थल को डिटेंशन केंद्र घोषित करने का निर्देश दिया गया है.

इस घटना के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी ने रोहिंग्याओं के ‘तुष्टिकरण’ को लेकर एकदूसरे पर आरोप लगाए थे.

द हिंदू द्वारा गृह मंत्रालय से आरटीआई आवेदन में दिल्ली सरकार को भेजे गए पत्र की सामग्री और इसे भेजने के बारे में सवाल पूछे गए थे. इसके जवाब में मंत्रालय ने कहा कि उक्त जानकारी को आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (ए) के तहत छूट मिली हुई है क्योंकि इस जानकारी को ‘गोपनीय’ चिह्नित किया गया है.

बता दें कि गृह मंत्रालय के एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में करीब 40,000 रोहिंग्या रहते हैं.

वर्तमान में दिल्ली में रोहिंग्या उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में एक रिहायशी इलाके के बगल में एक खुली जगह में टेंट में रहते हैं. जिस जमीन पर टेंट लगाए गए हैं, वह गैर सरकारी संगठन जकात फाउंडेशन की है.

म्यांमार में हिंसा की कई घटनाओं के बाद 2012 में लगभग 1,200 रोहिंग्या दिल्ली आए. वे ज़कात फ़ाउंडेशन की ज़मीन में बस गए लेकिन 2018 में उनके कैंप में आग लगने के बाद वे उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग की बगल की ज़मीन पर चले गए. 2021 में उनके शिविर में एक और आग लगने के बाद वे ज़कात की जमीन पर वापस आ गए जो दिल्ली के क्षेत्र में आती है.

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