भोपाल– मप्र में गजबै हुआ,हुआ यह की भोपाल के सेन्ट्रल प्रेस क्लब जो पत्रकारों के हित का दावा करता है और जनसम्पर्क और मीडिया संस्थानों के बीच सेतु का दावा,ठीक दावा करे करना भी चाहिए लेकिन जब दावा जमीन पर नहीं दिखता तब शंका होती है की यह जुटान सिर्फ कुछ लोगों के हित के लिए है या पत्रकारों के ? इस जुटान की इतनी बड़ी खबर संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफार्म से ही गायब है.
खैर अभी हाल में इस क्लब की नयी कार्यकारिणी घोषित की गयी और दागरहित एवं ऊर्जावान लोगों को इसमें पदाधिकारी बनाया गया,उसमें कुछ वे भी घुसे जिन्हें किसी संगठन की जिम्मेदारी की बैसाखी चाहिए थी,संगठन के पुरोधा चूंकि बहुत पुराने पत्रकार हैं इसलिए उनका सम्मान रखना ही है लेकिन इस पत्रकारिता से समाज को क्या प्राप्त हो रहा है या उन पत्रकारों को क्या फायदा जो बुलावे पर अपना समय और धन खर्च कर दौड़े-दौड़े चले आते हैं.
दो जन-संपर्क आयुक्तों का सम्मान किया गया,लेकिन जो विभाग को करना था वह प्रेस क्लब ने किया ,जाहिर है पैसा भी क्लब का खर्च हुआ होगा आखिर वह पैसा जनसम्पर्क विभाग तो देगा नहीं,नए अध्यक्ष ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दावा किया लगभग 150 पत्रकारों की उपस्थिति का यहाँ तक भी सब बल्ले-बल्ले रहा ,अपना पीछा विभाग से छुड़ा पूर्व आयुक्त राजनेताओं की तरह खूब झूठ बोले और जार-जार रोये इस विभाग से दूर जाने के मलाल को लेकर,जबकि कुछ वीआईपी पत्रकारों को छोड़ें तो आम पत्रकार उनके दीदार को तरस गए थे साहब सब से बचने माध्यम की एसी की हवा खाते थे जनसंपर्क विभाग में उनका आना कम ही था.
चूंकि पत्रकारों का सम्बन्ध लिखने पढ़ने और छपास से रहता है और दावे अनुसार लगभग 150 पत्रकार उपस्थित रहे लेकिन जब हमने खबर लिखने तक जानकारी जुटाई तब तक बामुश्किल उँगलियों पर गिनने लायक या जो हमारी जानकारी से छूट गए होंगे दो या चार संस्थानों ने ही यह खबर लगाई,इससे बड़ी बेइज्जती तो आयुक्तों की यह रही की उपस्थित पदाधिकारियों सहित किसी ने अपने सोशल प्लेटफार्म पर भी इस आयोजन की जानकारी प्रस्तुत नहीं की,हो सकता हमारे जागरण के बाद कुछ जागें और जनता को परिचित करवाएं।
जनसम्पर्क विभाग के दो आयुक्त,कर्मचारी और पत्रकारों का जुटान लेकिन खबर से खबरची दूरी बना कर रखें यह हास्यास्पद है या चिंताजनक आखिर इस जुटान से किसे क्या फायदा या शोध का विषय है.
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