वाशिंगटन-अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर नई फीस $100,000 लगाने की घोषणा की थी. इसका उद्देश्य वीजा प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकना और गैर-इमिग्रेंट वर्कर्स के प्रवेश को सीमित करना है. हालांकि, यह फीस नई H-1B वीजा अप्लिकेशन्स पर एक बार ही लगेगी. भारत ट्रंप के फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है, क्योंकि पिछले दशक में लगभग तीन-चौथाई H-1B वीजा भारतीय नागरिकों को ही जारी किए गए हैं. भारत सरकार, खासकर विदेश मंत्रालय (MEA), अमेरिका और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत में लगा हुआ है.
शुक्रवार को MEA के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने बताया कि अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी ने नियम में बदलाव के लिए stakeholders को एक महीने का समय दिया है, ताकि वे अपने सुझाव और टिप्पणियां भेज सकें. भारत की तरफ से यह भी कहा गया कि H-1B वीजा पर skill mobility से दोनों देशों में innovation, productivity और wealth creation में मदद मिलती है. सरकार उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ लगातार संपर्क में है, और उम्मीद करती है कि नए नियमों पर इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा.
जयसवाल ने बताया कि जनवरी से सितंबर तक अमेरिका ने 2,417 भारतीय नागरिकों को लौटाया है. भारत अवैध प्रवास के खिलाफ सख्त है और कानूनी माइग्रेशन के रास्ते को बढ़ावा देना चाहता है. जिन भारतीयों की कानूनी स्थिति साबित होती है, उन्हें वापस लाया जाता है. भारत के कई मंत्रालयों और राज्य सरकारों ने मिलकर अवैध माइग्रेशन को रोकने के लिए एजेंट्स और अन्य लोगों पर कार्रवाई की है, ताकि केवल कानूनी और सुरक्षित माइग्रेशन को बढ़ावा दिया जा सके.
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