अकोला-असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) पर आरोप लगते रहे हैं कि वह चुपचाप बीजेपी की मदद करती है, इसलिए इसे बीजेपी की ‘बी टीम’ कहा जाता रहा है. लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले में अब यह छुपा हुआ नहीं रहा. असंभव लगता था, लेकिन अकोट नगर परिषद में बीजेपी और AIMIM ने खुलकर सत्ता साझा करने के लिए हाथ मिलाया. अब वे ‘ए टीम’ बन गए हैं और कांग्रेस विपक्ष में बैठ गई है.महाराष्ट्र में यह नाटकीय मोड़ मंगलवार को आया. हाल ही में हुए अकोट नगर परिषद चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. 35 सदस्यों वाली परिषद में बीजेपी ने सिर्फ 11 सीटें जीतीं, जिससे उसे सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा. कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसके पास छह सीटें थीं, जबकि ओवैसी की AIMIM तीसरे नंबर पर रही और पांच सीटें जीतीं.
इसके बाद जो हुआ, वह अकल्पनीय था. बीजेपी ने ‘अकोट विकास मंच’ नामक गठबंधन बनाया और AIMIM के साथ मिलकर नगर परिषद पर नियंत्रण हासिल किया. इस गठबंधन में एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजीत पवार की NCP और बच्चू कादू की प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल हैं. इस नए गठबंधन के साथ बीजेपी की अगुवाई वाली फ्रंट को अब 25 पार्षदों का समर्थन मिला, जो बहुमत के निशान को आसानी से पार कर गया. बीजेपी की माया धुले को मेयर बनाया गया. कांग्रेस और प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाडी विपक्ष में बैठेंगी. अकोट विकास मंच का यह गठबंधन अकोला जिला प्रशासन में भी औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया है.
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