उज्जैन- उज्जैन के समय से आठ साल पीछे चल रही 509 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सीवरेज परियोजना पर एक बार फिर से संकट के बादल छा गए हैं। हैदराबाद की टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद अधूरे काम से हाथ खींचते हुए साइट पर काम पूरी तरह बंद कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस मनमानी के बावजूद नगर निगम ने न तो ठेका निरस्त किया है और न ही अब तक कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई शुरू की है।
परियोजना की निगरानी कर रही कंसल्टिंग फर्म ने नगर निगम को अवगत कराया है कि टाटा प्रोजेक्ट्स ने अपने पेटी कॉन्ट्रेक्टरों और मटेरियल सप्लायरों के 20 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान रोक रखे हैं। इससे न सिर्फ साइट पर काम ठप हो गया है बल्कि शहर के अन्य विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
गौरतलब है कि सीवरेज परियोजना में लगातार देरी, वादाखिलाफी और बेहद धीमी प्रगति को देखते हुए नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने 19 नवंबर 2025 को टाटा प्रोजेक्ट्स को तीन सालों के लिए निगम के सभी विभागों से ब्लैकलिस्ट कर दिया था। हालांकि, उस समय ठेका निरस्त नहीं किया गया था और कंपनी को अंतिम अवसर देते हुए काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए।
शहर को खुले में बहते सीवरेज से मुक्ति दिलाने और शिप्रा नदी की शुद्धि के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना का अब भी 9.5 प्रतिशत काम अधूरा है। जबकि, ठेके की शर्तों के अनुसार यह परियोजना 7 नवंबर 2017 को आवंटित की गई थी और दो सालों में यानी 20 नवंबर 2019 तक पूरी हो जानी थी। आठ सालों में आठ बार समयसीमा बढ़ाने के बावजूद लगभग 10 प्रतिशत काम अब भी बचा है।
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