होर्मुज-ईरान-अमेरिका युद्ध में सीजफायर के बाद भी होर्मुज से बड़ी मुश्किल से जहाज निकल पा रहे हैं. ईरान ने हर दिन 15 जहाज की एक सीमा भी तय कर दी है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सीजफायर के बाद भी होर्मुज से लंबे समय तक जहाजों की सामान्य आवाजाही मुश्किल है और उन्होंने इसके तीन कारण भी बताए हैं.
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बहुत संकरा है. इससे गुजरने वाले तेल टैंकर बहुत बड़े और बहुत धीमे होते हैं. अपने सबसे संकरे हिस्से में, यह जलमार्ग सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है. ईरान तट से ही अपने लक्ष्यों को तब तक भेद सकते हैं, जब तक कि उन्हें अमेरिका के सबसे हाई-टेक रक्षा सिस्टम भी रोक न पाएं.
ईरान की नौसेना के पास स्ट्रेट में शक्तिशाली समुद्री-माइन (बारूदी सुरंगों) का जाल बिछाने की क्षमता है. अगर ये माइन फटती हैं, तो उनमें सबसे बड़े टैंकरों को भी पल भर में डुबोने की ताकत है, साथ ही हर हमले में लाखों डॉलर का माल भी नष्ट हो सकता है.
ईरान चाहता है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज एक शुल्क का भुगतान करें. इस रास्ते से टैंकर ले जाने वालों को प्रति बैरल लगभग एक डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है. हर जहाज में 20 से 30 लाख बैरल तक तेल होता है. यानी हर टैंकर को 20 से 30 लाख डॉलर का शुक्ल अदा करना होगा.
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