सुभाष चंद्रा पर CBI ने ₹1,322 करोड़ के मामले में दर्ज किया केस

नई दिल्ली-एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। सीबीआई ने सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने इस मामले में सुभाष चंद्रा के अलावा पंकज सुरोलिया, अमीश पांड्या और राजीव ढोलकिया को आरोपी बताते हुए केस दर्ज किया है।

उनके ऊपर 2018 से 2026 के बीच LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी के आरोप हैं। LICHFL का दावा है कि 2018 में क्रेडिट फैसलिटीज लेते वक्त सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 59113 करोड़ रुपये की नेटवर्थ का सर्टिफिकेट दिया था, लेकिन उन्होंने 2024 में अपनी नेटवर्थ महज 31.79 करोड़ रुपये बताई थी।

LICHFL की शिकायत में नेटवर्थ सर्टिफिकेट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि लोन मंजूर कराने के दौरान सुभाष चंद्रा की वित्तीय क्षमता दिखाने के लिए जो दस्तावेज जमा किए गए, उनमें उनकी नेटवर्थ हजारों करोड़ रुपये में बताई गई थी। 500 करोड़ रुपये के लोन के लिए DIM & Co. ने 28 मार्च 2018 को एक नेटवर्थ सर्टिफिकेट जारी किया था।

इसमें सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ करीब 59,113 करोड़ रुपये यानी 6,197.62 मिलियन डॉलर बताई गई थी। इसके कुछ महीने बाद 480 करोड़ रुपये के लोन के लिए MPJ & Co. चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने 6 जुलाई 2018 को एक दूसरा नेटवर्थ सर्टिफिकेट जारी किया। इसमें उनकी नेटवर्थ करीब 40,562 करोड़ रुपये दिखाई गई थी। यानी दोनों लोन के समय उनकी व्यक्तिगत नेटवर्थ को कई हजार करोड़ रुपये का बताया गया था। इसके बाद में दोनों लोन अकाउंट डिफॉल्ट हो गए। इसके बाद मामला इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत शुरू हुई दिवाला समाधान प्रक्रिया तक पहुंचा।

इसमें सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ करीब 59,113 करोड़ रुपये यानी 6,197.62 मिलियन डॉलर बताई गई थी। इसके कुछ महीने बाद 480 करोड़ रुपये के लोन के लिए MPJ & Co. चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने 6 जुलाई 2018 को एक दूसरा नेटवर्थ सर्टिफिकेट जारी किया। इसमें उनकी नेटवर्थ करीब 40,562 करोड़ रुपये दिखाई गई थी। यानी दोनों लोन के समय उनकी व्यक्तिगत नेटवर्थ को कई हजार करोड़ रुपये का बताया गया था। इसके बाद में दोनों लोन अकाउंट डिफॉल्ट हो गए। इसके बाद मामला इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत शुरू हुई दिवाला समाधान प्रक्रिया तक पहुंचा।

शिकायत के मुताबिक, LICHFL ने दो अलग-अलग लोन सुविधाओं के तहत कुल 980 करोड़ रुपये का मूल लोन मंजूर किया था। ब्याज और दूसरे शुल्क जुड़ने के बाद ये रकम बढ़कर करीब 1,322 करोड़ रुपये हो गई।

 

 

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