वाशिंगटन-ईरान और अमेरिका एक-दूसरे पर फिर से मिसाइलें और ड्रोन गिरा रहे हैं. इसका असर कच्चे तेल की कीमत पर पड़ा है. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. बुधवार (9 सितंबर 2026) को ब्रेंट क्रूड के दामों में 2.25% का इजाफा हुआ. इससे 2 दिन पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत 98 बैरल प्रति डॉलर थी. कच्चे तेल में बीते 6 हफ्ते में इतना बड़ा इजाफा हुआ है. 24 जुलाई को क्रूड का दाम 100 बैरल प्रति डॉलर पहुंचा था. अगर कच्चे तेल के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे, तो पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम भी बढ़ सकते हैं.
क्रूड ऑयल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है. ये समुद्री रास्ता करीब 167 किमी लंबा है. होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है. सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं. यही नहीं, भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है. खुद ईरान भी इसी रूट से तेल एक्सपोर्ट करता है.
ईरान जंग के कारण यह होर्मुज स्ट्रेट अब सुरक्षित नहीं रहा है. खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहे हैं. ऐसे में लॉन्ग रूट से सप्लाई लेने से तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है. सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पहले ही घाटे में चल रही थीं. पेट्रोलियम मंत्रालय की ज्वॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर हर महीने करीब 30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है.
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