वाराणसी-सन् 1601ई०, संवत् 1658 को भाद्रपद के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि में आज से 425 वर्ष पूर्व तत्कालीन काशी वर्तमान में चंदौली जनपद के रामगढ़ ग्राम में एक ऐसे महापुरुष का जन्म हुआ जिनकी कीर्ति अखंड भारत में दिग्दिगंत तक सुविख्यात रही और आज भी पूरे भारतवर्ष में उन महापुरुष की अनेकानेक जनकल्याणकारी व चमत्कृत कर देने वाली कथाओं के श्रवण मात्र से लोग विस्मित व अभीभूत हो जाते हैं। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को आपके 426वें प्राकट्य दिवस पर महाराज को कोटि-कोटि प्रणाम।
अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम राम जी अपने भौतिक शरीर से 170 वर्ष तक एक ऐसे कालखण्ड में मानवता के रक्षक बने रहे जब भारत भूमि पर कई क्रूर आततायी शासकों का शासन था। उस समय महाराजश्री यातायात के साधनों के नितांत अभाव में भी अपनी सिद्धियों से आकाश मार्गी हो पूरे अखंड भारत में भ्रमण कर-करके सनातनियों की रक्षा न सिर्फ आततायियों से किये बल्कि हिन्दू धर्म के पोंगापंथियों से भी किये। आपने अस्पृश्यता, छुआछूत, जमींदारों के अत्याचार से भी जनसाधारण को बचाया।आपने योगीजन का भी मार्गदर्शन करके एकाकी साधना से विरत हो समाजहित में निरत किया।
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