नई दिल्ली-हाल ही में आयोजित हुए BRICS (ब्रिक्स) सम्मेलन के बाद अमेरिका में हलचल मच गई है. ब्रिक्स ग्रुप के देशों ने आपसी व्यापार को बढ़ाने को लेकर कई कदम उठाए हैं, जिनसे अमेरिका चिंतित है. इस बीच वह इन दिनों यूक्रेन युद्ध के चलते रूस को समूची दुनिया से अलग-थलग करने में जुटा है और ब्रिक्स सम्मेलन के चलते उसकी इस मुहिम को धक्का लगा है. इस सिलसिले में रूस से व्यापार करने वाले देशों पर वह मोटे टैरिफ लगाकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटा है.
ब्रिक्स सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सबसे पहले भारत पहुंचे नेताओं में से थे. इस सम्मेलन से इतर भारत और रूस ने कच्चे तेल के व्यापार और ऊर्जा साझेदारी के साथ-साथ अहम रक्षा सौदों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं. इस समय भारत अपनी तेल जरूरतों की 45 से 51 फीसदी आपूर्ति रूस से ही कर रहा है. अमेरिका इससे खुश नहीं है. ऐसे में उसने भारत समेत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है.
अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक अहम बिल पर वोटिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है. अगर यह बिल पास होता है तो इसका असर भारत और चीन समेत करीब 10 देशों पर सीधा असर पड़ेगा.
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