नई दिल्ली-न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीडीएसए) ने शुक्रवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में अगस्त में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान लगाए गए फिलिस्तीन समर्थक नारों की कवरेज के लिए ज़ी न्यूज़ पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्राधिकरण ने कहा कि इस प्रसारण ने उसके आचार संहिता का उल्लंघन किया था. यह आदेश अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र ताल्हा मन्नान की शिकायत पर पारित किया गया.
12 अगस्त को मन्नान ने फीस बढ़ोतरी के विरोध और छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर आयोजित छात्र प्रदर्शन में करीब 18 मिनट का भाषण दिया था.
लाइव लॉ के अनुसार, मन्नान ने आरोप लगाया कि इसके बाद ज़ी न्यूज़ ने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों के 10 से 15 सेकेंड के चुनिंदा वीडियो क्लिप प्रसारित किए. उनके अनुसार, इन क्लिप के जरिए प्रदर्शनकारियों द्वारा फिलिस्तीन के प्रति जताई गई एकजुटता को ‘आपराधिक या राष्ट्र-विरोधी आचरण’ के रूप में पेश किया गया.
शिकायत में ज़ी न्यूज़ के 16 अगस्त को प्रसारित दो कार्यक्रमों- ‘देशहित’ और ‘डीएनए’ को चुनौती दी गई थी. ‘देशहित’ कार्यक्रम का शीर्षक था- ‘एएमयू में फिलिस्तीन प्रेमी गैंग’… ‘योगी स्टाइल’ में होगा इलाज!’ वहीं, ‘डीएनए’ कार्यक्रम का शीर्षक था- ‘फीस माफी वाले आंदोलन में ‘फिलिस्तीन जिंदाबाद’ कहां से आ गया? अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’समाचार नियामक ने पाया कि प्रदर्शन में कई मांगें शामिल थीं, जिनमें फीस बढ़ोतरी का विरोध भी था. लेकिन प्रसारक ने प्रदर्शन के मुख्य उद्देश्य को छोड़ दिया और अपना पूरा ध्यान केवल फिलिस्तीन के समर्थन में लगाए गए नारों पर केंद्रित कर दिया. प्राधिकरण ने कहा कि इससे ऐसा भ्रामक प्रभाव पैदा हुआ कि पूरा प्रदर्शन ही फिलिस्तीन के मुद्दे पर केंद्रित था.
प्राधिकरण ने स्क्रीन पर दिखाए गए कुछ टिकर (विज़ुअल के साथ दिखने वाला टेक्स्ट) पर भी आपत्ति जताई. इनमें ‘एएमयू में फिलिस्तीन प्रेमी गैंग’ और ‘योगी स्टाइल में होगा इलाज’ जैसे वाक्य शामिल थे.प्राधिकरण ने ज़ी न्यूज़ को निर्देश दिया कि वह आपत्तिजनक फुटेज को अपनी वेबसाइट, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म से हटा दे, जहां ऐसा करना संभव हो. इसमें ऐसे हाइपरलिंक भी शामिल हैं, जिनके माध्यम से इन प्रसारणों तक पहुंचा जा सकता है.
इसके अलावा ज़ी तेलुगु न्यूज़ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. चैनल ने एक कार्यक्रम प्रसारित किया था जिसमें गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों की ट्रांसजेंडर पहचान को ‘फर्जी’ बताया गया था और प्रसारण में इस्तेमाल की गई तस्वीरों के स्रोत के बारे में भी वह स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका.
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