नई दिल्ली – भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक सोमवार को शुरू हो चुकी है और बुधवार को समिति अपना फैसला सुना देगी। इससे पहले विभिन्न ब्रोकरेज संस्थानों ने नीतिगत दरें बढ़ने का अनुमान जताया है। उनका मानना है कि कच्चे तेल की दरें बढ़ने, विदेशी निवेशकों में मची भगदड़ के चलते विदेशी मुद्रा भंडार और मानसूनी बारिश की कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव जैसी चुनौतियों ने एमपीसी को असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
अब सबकी निगाहें एमपीसी डिसिजन पर टिकी हैं, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों, बाजार एवं अर्थव्यवस्था की स्थिति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों में ज्यादातर ने ब्याज दरें बढ़ने के पक्ष में फैसला सुना दिया है। जेएम फाइनेंशियल, यूनियन बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के विशेषज्ञों की राय है कि आरबीआई न केवल इस बार, बल्कि इस वर्ष और दो बार 25-25 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि कर सकता है। इस तरह, इस वर्ष ब्याज दरें 6% तक पहुंचने की आशंका है। ऐसा हुआ तो आने वाले समय में आम लोगों पर चौतरफा मार पड़ेगी। रिपोर्टों की मानें तो 7 अक्तूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी की घोषणा हो सकती है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.50% हो जाएगा। फिर होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन जैसे बैंक लोन की ईएमआई बढ़ेगी और लोगों के पास दूसरी जरूरतों और सुविधाओं पर खर्च करने के लिए कम पैसे बचेंगे।
अल नीनो के कारण कम मानसूनी बारिश हुई है जिसका असर खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ेगी। यह आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ेगा। खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव के रूप में सामने आ सकता है। ऊपर से मानसूनी बारिश में कमी ने पहले से ही किसानों को झटका दे रखा है। महाराष्ट्र के 75% इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा है।
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