नई दिल्ली-जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता का सिर फोड़ने का दावा करने वाले हिंदुत्व कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज को मंगलवार (6 अक्टूबर) को नियमित जमानत दे दी गई. इससे पहले उन्हें 15 सितंबर को तीन सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी.
लाइव लॉ के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर ने यह आदेश पारित किया. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में कुछ कमियों की ओर इशारा किया था और जांच अधिकारी को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था.
भारद्वाज को कथित हमले के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के करीब 24 घंटे बाद, 7 सितंबर को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (तिहाड़ जेल) में भेज दिया गया था. मजिस्ट्रेट अदालत ने शुरुआत में पुलिस को एक दिन की हिरासत दी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर लगभग दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत कर दिया गया. इसके बाद उन्हें तीन सप्ताह की जमानत मिली थी.
बार एंड बेंच के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट में ज़मानत की सुनवाई के दौरान वकील उमेश चंद्र शर्मा ने भारद्वाज का पक्ष रखा और तर्क दिया कि उन्हें दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक कारणों से गिरफ़्तार किया था और शिकायतकर्ता ने ही उन पर हमला किया था.
उनकी कथित गतिविधियों और बाद में सामने आए बयानों को लेकर व्यापक जन आक्रोश के बाद संसद मार्ग पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. शुरुआत में उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2) और 126(2) के तहत आरोप लगाए गए थे, जो जमानती धाराएं हैं. बाद में वायरल हुए एक वीडियो में कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणियां किए जाने के बाद उनके खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए.
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