मुंबई-चुनाव आयोग ने बॉम्बे हाई कोर्ट में गोवा में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के दौरान एक ही परिवार के छह वोटरों के नाम हटाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई टालने की मांग की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने मंगलवार को इस अपील को खारिज कर दिया।
चुनाव आयोग के वकील गौरीश अग्नि बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट की मुख्य बेंच SIR के मामले को देख रही हैं, इसलिए इस मामले की सुनवाई तब तक टाल दी जानी चाहिए जब तक कि उस मुद्दे पर कोई फैसला न हो जाए।चुनाव आयोग के वकील ने दलील दी कि पूरी SIR प्रक्रिया ही चुनौती के दायरे में है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सिक्किम और उत्तराखंड के हाई कोर्ट ने सुनवाई टाल दी है क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसने इसे 8 अक्टूबर के लिए लिस्ट किया है।
EC के वकील की दलील सुनने के बाद जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की दो जजों वाली बेंच ने कहा, ‘परेश सालगांवकर की याचिका SIR की वैधता को चुनौती नहीं देती है और सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस याचिका पर सुनवाई में कोई बाधा नहीं बनेगा।’
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