वाशिंगटन, 25 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय इंजीनियरों को बड़ी राहत देते हुए अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने घोषणा की है कि देश में मौजूदा एच-1बी वीजा और अन्य वीजा धारकों के जीवनसाथी 26 मई से इस देश में काम कर सकेंगे।
वाशिंगटन, 25 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय इंजीनियरों को बड़ी राहत देते हुए अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने घोषणा की है कि देश में मौजूदा एच-1बी वीजा और अन्य वीजा धारकों के जीवनसाथी 26 मई से इस देश में काम कर सकेंगे।
यूएससीआईएस की घोषणा के अनुसार, “घरेलू सुरक्षा विभाग (डीएसएस) एच-1बी वीजा धारकों पर निर्भर उन खास एच-4 वीजा धारक जीवनसाथियों को रोजगार पाने की योग्यता प्रदान करता है, जो रोजगार आधारित कानून सम्मत स्थायी निवास (एलपीआर) के दर्जे की मांग कर रहे हैं।”
एच-4 वीजा एच-1बी वीजा धारकों, अन्य वीजा धारकों के जीवनसाथियों को दिए जाते हैं। मौजूदा समय में एच-4 वीजा धारक कोई नौकरी नहीं कर सकते या फिर किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा हासिल नहीं कर सकते।
अधिकांश भारतीयों को एच-1बी वीजा दिया जाता है, जिनमें से अधिकतर विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग सेवा में कार्यरत होते हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2013 में 96,753 लोगों को एच-4 वीजा दिया गया था, जिनमें से 76 फीसदी दक्षिण एशिया से ताल्लुक रखते हैं।
नए नियम के मुताबिक, एच-4 वीजा धारक को 26 मई से रोजगार अधिकार संबंधित आवेदन पत्र भरना होगा।
यूएससीआईएस के अनुमान के मुताबिक, 1,79,600 लोग इस साल आवेदन कर सकते हैं और इसके बाद हर साल 55,000 लोग आवेदन कर सकते हैं।
यूएससीआईएस के निदेशक लीएन रॉड्रिग्ज ने कहा, “इन वीजा धारकों के जीवनसाथियों को अमेरिका में कानूनी रूप से काम करने का अधिकार देना उचित है।”
रॉड्रिग्ज ने कहा, “यह व्यवस्था उन खास परिवारों को अधिक आर्थिक स्थायित्व और गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करेगा।”
यूएससीआईएस ने कहा है कि एच-4 वीजा धारकों को काम करने की अनुमति देना राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नवंबर में घोषित विशिष्ट कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रिपब्लिकन के बहुमत वाले कांग्रेस में इसका विरोध हुआ था, लेकिन इस योजना का उद्देश्य अमेरिका की आव्रजन प्रणाली को दुरुस्त करना और 50 लाख अवैध प्रवासियों की हिफाजत करना है।
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