धारा 66ए पर न्यायालय का फैसला सकारात्मक : नैसकॉम

बेंगलुरू, 24 मार्च (आईएएनएस)। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी आधारित सेवाओं के प्रतिनिधि संगठन ‘नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसिस कंपनीज’ (नैसकॉम) के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि आईटी अधिनियम-2000 की धारा 66ए को निरस्त किया जाना एक सकारात्मक घटना है और यह इस देश के लिए एक शुभ समाचार है।

नैसकॉम के अध्यक्ष आर. चंद्रशेखर ने नई दिल्ली से आईएएनएस को बताया, “सर्वोच्च न्यायालय का फैसला एक सकारात्मक घटना और सही कदम है। यह आईटी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप है।”

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार सुबह धारा 66ए को निरस्त कर दिया, क्योंकि यह नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी देने वाली संविधान की धारा 19(1)(ए) का उल्लंघन करता है।

चंद्रशेखर ने कहा कि न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि आईटी अधिनियम की धारा 79(3) का उपयोग सिर्फ न्यायालय के आदेश पर ही किया जा सकता है, कार्यपालिका के आदेश पर नहीं।

उन्होंने कहा, “नए स्पष्टीकरण के बाद बिना वैधानिक निर्देश के इस धारा का उपयोग करने पर कार्यपालिका को जवाबदेह होना पड़ेगा।”

चंद्रशेखर ने कहा, “फैसला देश और लोकतंत्र के लिए शुभ है। प्रौद्योगिकी का सही उपयोग करने में हालांकि सावधानी बरतनी होगी और इसका उपयोग किसी को आहत करने में नहीं होना चाहिए।”

धारा 66ए में कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति जो कंप्यूटर के किसी भी स्रोत से अपमानजनक या धमकी भरी सूचना या ऐसी सूचना का प्रसार करता है, जिसके बारे में वह जानता है कि वह गलत है, लेकिन परेशान करने, असुविधा पैदा करने, खतरा, बाधा या अपमान करने के लिए ऐसा करता है, उसे तीन साल तक के कारावास की सजा दी जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।”

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