एम्स फोन से करेगा मिरगी रोगियों की देखरेख

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के दूर-दराज के इलाकों से राजधानी स्थित अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल एम्स में उपचार के लिए रेल की अनारक्षित बोगियों में बिना सोए रात भर सफर कर आने वाले मिरगी रोगियों के बीच सफर में ही दौरे का शिकार होने की घटनाओं को देखते हुए जल्द ही एम्स टेलीफोन के जरिए इस तरह के रोगियों की आगे की देखरेख की सुविधा शुरू करेगा।

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के दूर-दराज के इलाकों से राजधानी स्थित अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल एम्स में उपचार के लिए रेल की अनारक्षित बोगियों में बिना सोए रात भर सफर कर आने वाले मिरगी रोगियों के बीच सफर में ही दौरे का शिकार होने की घटनाओं को देखते हुए जल्द ही एम्स टेलीफोन के जरिए इस तरह के रोगियों की आगे की देखरेख की सुविधा शुरू करेगा।

एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि कई रोगियों को संबंधित चिकित्सक से फोन पर परामर्श प्रदान कर राहत पहुंचाया जा सकता है और उन्हें लंबी दूरी की यात्रा के तनाव से मुक्ति दी जा सकती है।

एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर ममता भूषण सिंह ने आईएएनएस से कहा, “रोगियों में अधिकांश बिहार या उत्तर प्रदेश के होते हैं। ये रोगी दवा लेने के दौरान तो महीनों तक दौरे का शिकार नहीं होते, लेकिन भीड़ भरे अनारक्षित रेल डिब्बे में बैठकर आते हुए न सो पाने के कारण कुछ रोगियों को ट्रेन में ही दौरे पड़ने लगते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “टेलीफोन से उपचार संबंधी परामर्श प्रदान कर न केवल उनका पैसा बचेगा, बल्कि समय भी जाया नहीं होगा।”

इस संबंध में एक अध्ययन अनियमित तरीके से चुने गए 450 रोगियों पर किया गया, जिनकी देखरेख फोन के जरिए की गई। उनसे यह पूछा गया कि क्या वे खुश और संतुष्ट हैं। सिंह ने कहा, “फोन पर उपचार परामर्श से वे अत्यंत खुश थे।”

सिंह ने कहा कि भारत में मिरगी के करीब 12 प्रतिशत रोगी हैं। ग्रामीण इलाकों में और डॉक्टरों की अधिक आवश्यकता है। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षक और स्वयंसेवियों की भी जरूरत है जो स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि अधिकांश लोग अभी तक दूसरों को बताने में संकोच महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा, “मिरगी को समझना और उसका इलाज कराना जरूरी है। इलाज वहन करने योग्य है और दवा के साथ रोगियों को मिरगी के बारे में शिक्षित होना जरूरी है कि इसका सटीक इलाज हो सकता है और यह कि दवाओं की खुराक व उचित नींद कभी नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए।”

मिरगी का सबसे बड़ा कारण टेपवर्म के अंडे हैं, जो अच्छी तरह नहीं पकाए गए सूअर का मांस खाने से या फिर गंदा पानी पीने से या बिना धोए पत्तों का सलाद या बंदगोभी खाने से हो जाता है।

न्यूरोसाइस्टिसेरोसि एक पारासाइटिक संक्रमण है, जो वयस्क टेपवर्म के अंडों के अंतरग्रहण का परिणाम है, जिससे विकासशील देशों में दौरे और मिरगी को पांव पसारने का मौका मिलाता है।

उन्होंने आगे बताया, “एक बार अंतरग्रहण हो गया तो टेपवर्म के अंडे दिमाग तक पहुंच जाते हैं। ये दूषित जल से या सलाद के पत्ते या पत्तागोभी खाने से आता है। पत्तागोभी या सलाद के पत्ते में टेपवर्म खुले में शौच त्यागने के कारण आ जाता है।”

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