तिुरलनंतपुरम, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। ईस्टर की प्रार्थना में शामिल होने के लिए रविवार को केरल के गिरजाघरों में ईसाई समुदाय के लोगों का आना-जाना लगा रहा। गिरजाघरों से वापस आने के बाद उन्होंने ईस्टर का शानदार नास्ता किया।
कुछ लोग सूर्योदय से पूर्व की प्रार्थना में शामिल होने के लिए गिरजाघर पहुंचे तो कुछ लोग सूर्योदय के बाद की प्रार्थना में शामिल हुए।
ज्यादातर गिरजाघरों में ईस्टर की प्रार्थना सभा का समापन पादरी के केक देने के बाद हुआ। वहीं कुछ स्थानों पर एक चम्मच वाइन श्रद्धालुओं में बांटने के बाद प्रार्थना सभा समाप्त हुई।
पाम रविवार (ईस्टर के पूर्व का रविवार) से अगले एक सप्ताह तक ईसाई समुदाय के लोग अनुष्ठानों और उत्सवों में व्यस्त रहते हैं। रविवार को सुबह की प्रार्थनाओं के बाद यह सप्ताह समाप्त हो जाता है। माना जाता है कि पाम रविवार के दिन ही ईसा मसीह ने जेरूसलम में प्रवेश किया था।
75 वर्षीय गृहिणी मरियम्मा जॉन ने कहा, “ईस्टर के व्रत में लोगों की रुचि बढ़ने का एक प्रमुख कारण यह है कि अतीत में लोग पूर्ण रूप से शाकाहार अपना रहे थे, यह प्रतीकात्मक है और ईसा मसीह का पुनर्जन्म हमारे जीवन में नई उम्मीद की तरह था।”
उन्होंने कहा, “लेकिन मुझे शक है कि आज यह धर्म की जगह किसी के स्वास्थ्य को कारगर बनाने का उपकरण बन चुका है।”
प्रार्थना के बाद सबसे प्रमुख आयोजन परिजनों के साथ मिलकर नाश्ता करने का होता है।
इसका मेन्यू ज्यादातर पारंपरिक है जैसे कि अप्पम (ताड़ी के साथ मिश्रित चावल का आटा), चिकन स्ट्यू और बीफ रोस्ट। कुछ स्थानों पर बतख प्रमुख मांसाहारी पकवान है। इसके अलावा इस अवसर पर स्टीम्ड केले, एग रोस्ट और केक जैसे पकवान भी बनाए जाते हैं।
मौजूदा दौर में समय कई लोगों के लिए बड़ी बाधा बनता जा रहा है। होटल और रिसॉर्ट ईस्टर के पकवानों की विविध किस्में उपलब्ध कराने लगे हैं। कुछ परिवार ईस्टर की प्रार्थना के बाद इन स्थानों पर समय बिताना पसंद करते हैं।
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