बेमौसम बारिश से पंजाब, हरियाणा में फसलें बर्बाद

चण्डीगढ़, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। पिछले करीब एक दशक से किसान भुपिंदर सिंह ने कई बार बंपर गेहूं की फसल के लिए आकाश की ओर देख कर भगवान को धन्यवाद दिया। यह साल हालांकि कुछ अलग रहा। बेमौसम बारिश ने सात एकड़ में लगी उसकी करीब 30 फीसदी फसल बर्बाद कर दी है।

चण्डीगढ़, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। पिछले करीब एक दशक से किसान भुपिंदर सिंह ने कई बार बंपर गेहूं की फसल के लिए आकाश की ओर देख कर भगवान को धन्यवाद दिया। यह साल हालांकि कुछ अलग रहा। बेमौसम बारिश ने सात एकड़ में लगी उसकी करीब 30 फीसदी फसल बर्बाद कर दी है।

जो फसलें खेत में खड़ी बची हैं, उनमें भी नमी की मात्रा खरीद के लिए निश्चित सीमा से अधिक रहेगी और ऐसी उपज के लिए अच्छी कीमत नहीं मिल पाएगी।

सिंह ने पंजाब के बालाचूर और गढ़शंकर शहरों के बीच समुद्र गांव के निकट अपनी खेत में धराशाई फसल को दिखाते हुए कहा, “मुझे और दूसरे किसानों को इतना भरोसा नहीं है कि सरकारी एजेंसियां हमारे गेहूं को खरीदेंगे। हम बर्बाद हो गए हैं। कई किसानों के पास अगली फसल बोने के लिए भी पैसा नहीं बचा है।”

फसल कटाई से ठीक पहले बारिश ने इसे बर्बाद कर दिया है। पंजाब और हरियाणा देश की कुल अनाज खरीदी में आधा योगदान करते हैं। दोनों राज्यों में उत्पादित होने वाले अनाज की अधिकांश मात्रा बैशाखी के बाद फसल कटाई से मिलती है।

हरियाणा में भी फसल की व्यापक बर्बादी हुई है।

हरियाणा के पानीपत जिले में दीवाना गांव के किसान जगदीश ने आईएएनएस से कहा, “कटाई से ठीक पहले 30-40 फीसदी गेहूं और अन्य फसलें बर्बाद हो गईं। सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए।”

खरीदी सत्र आधिकारिक तौर पर एक अप्रैल से शुरू होता है, लेकिन फसलों के पूरी तरह से नहीं पकने के कारण खरीदी सत्र की शुरुआत 10 दिन आगे बढ़ा दी गई है। खरीदी का लक्ष्य भी घटाया जा रहा है।

राजस्व अधिकारी दोनों राज्यों में हुए नुकसान का मूल्यांकन कर रहे हैं। 35-45 फीसदी नुकसान का अनुमान है।

राज्य सरकारों ने अधिक मुआवजे की मांग की है। केंद्र सरकार ने हालांकि मौजूदा नियम पर चलने की बात कही है, जिसके मुताबिक 50 फीसदी से अधिक बर्बादी पर ही मुआवजा दिया जाता है।

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि मुआवजा राशि बढ़ाकर प्रति एकड़ 10 हजार रुपये किया जाए।

बादल ने कहा कि मौजूदा 100 फीसदी नुकसान पर प्रति एकड़ 3,600 रुपये मुआवजा नाकाफी है। इससे लागत भी वसूल नहीं होती।

उन्होंने कहा, “पंजाब और उसके पड़ोसी राज्य में पिछले कुछ दिनों से काफी बारिश हुई है।” उन्होंने कहा कि एक और दो मार्च को औसत 42 सेंटीमीटर बारिश हुई है।

बादल ने कहा, “इस समय की बारिश यूं तो गेहूं और अन्य रबी फसल के लिए अच्छी होती है, लेकिन बारिश की तीव्रता और हवा के झोंके तथा ओलावृष्टि से काफी नुकसान हुआ है और कई किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है।”

गत वर्ष कम बारिश होने पर भी पंजाब में गेहूं और धान की रिकार्ड उपज हुई थी।

बेमौसम बारिश के बावजूद 2013-14 में पंजाब में 1.762 करोड़ टन गेहूं की उपज हुई थी। यह राज्य में दूसरी सर्वाधिक उपज थी।

2014 के खरीफ सत्र में पंजाब में 65 फीसदी कम बारिश हुई, लेकिन 1.69 करोड़ टन धान की उपज हुई।

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