नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि फैसले लेने में हुई भूल और फैसले लेने में भ्रष्टाचार के बीच फर्क किए जाने की जरूरत है। वह कुछ उद्योगपतियों और सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों में चल रही जांच के प्रसंग में यह बात कही।
सरकार के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित वार्षिक सम्मेलन में जेटली ने कहा, “भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की भाषा व्यापक स्तर पर अधिकारियों को फैसले लेने से रोक रही है।”
उन्होंने कहा, “कानून आयोग ने भी अपनी सिफारिश में कहा है कि इन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।”
वित्त मंत्री ने कहा, “मैं उद्योग जगत से आग्रह करता हूं कि फैसले लेने में होने वाली भूल को फैसले लेने में होने वाले भ्रष्टाचार से अलग करने के लिए आवश्यक बदलावों पर बहस में मदद के लिए कार्य समूह गठित करें।”
उन्होंने इस संबंध में फरवरी में पेश अपने आम बजट के एक प्रस्ताव का जिक्र किया, जिसमें कंपनियों द्वारा पहले अनुमति लिए जाने की व्यवस्था के स्थान पर एक ऐसी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है, जिसमें नियामक तभी हस्तक्षेप कर सकेंगे, जब किसी दिशानिर्देश का उल्लंघन हुआ हो।
जेटली ने कहा कि ऐसी व्यवस्था लागू करने में मदद करने के लिए एक समिति गठित की गई है।
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