खंडवा, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के विरोध में नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों ने सरकार की कार्रवाई को जनविरोधी करार दिया है।
खंडवा, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के विरोध में नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों ने सरकार की कार्रवाई को जनविरोधी करार दिया है।
राज्य सरकार ने ओंकारेश्वर बांध के जलस्तर की उंचाई 189 मीटर से बढ़ाकर 191 मीटर कर दी है। इसमें नर्मदा का पानी भी भरा जा चुका है। सरकार के इस कदम से कई गांव व घरों तक पानी पहुंचने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने शनिवार से पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल का कहना है कि राज्य सरकार ने पुर्नवास नीति का पालन नहीं किया है, साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देषों के मुताबिक मुआवजा प्रभावितों को नहीं दिया गया है। राज्य सरकार की मनमानी के खिलाफ ही चितरुपा पालित के नेतृत्व में 50 लोगों ने जल सत्याग्रह शुरू किया है।
जिलाधिकारी एम.के. अग्रवाल ने रविवार को आईएएनएस से कहा कि बांध में पानी 191 मीटर तक भरा जा चुका है, यह पानी खरगोन व बडवानी की ओर जाने वाली नहरों से किसानों तक पहुंचाना है। इस पानी से लगभग 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। जहां तक मुआवजे की बात है, प्रभावितों को मुआवजा और पुर्नवास का लाभ दिया जा चुका है। कुछ लोग जबरन पानी में जाकर बैठ गए हैं, जबकि बांध का जलस्तर बढ़ने से कोई प्रभावित नहीं हुआ है।
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