खंडवा, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के विरोध में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के नेतृत्व में खंडवा जिले में ग्रामीणों का जल सत्याग्रह सोमवार को तीसरे दिन भी जारी है।
जल सत्याग्रह में शामिल आंदोलनकारियों के गले तक पानी पहुंच गया है। वहीं सरकार का दावा है कि जलस्तर बढ़ने से खरगोन व बडवानी जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि नर्मदा नदी पर बने ओंकरेश्वर बांध के जलस्तर की उंचाई 189 मीटर से बढ़ाकर 191 मीटर कर दी गई है। जल भराव का काम जारी है। वहीं नर्मदा बचाओ आंदोलन और ग्रामीणों का आरोप है कि जलस्तर बढ़ने से कई गांवों के डूब क्षेत्र में आने का खतरा बढ़ रहा है।
सत्याग्रहियों का आरोप है कि राज्य सरकार ने पुर्नवास नीति का पालन नहीं किया है, न ही प्रभावितों को मुआवजा ही दिया गया है।
राज्य सरकार के निर्देश पर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के खिलाफ खंडवा जिले के घोगलगांव के करीब 50 लोग चितरुपा पालित के नेतृत्व में जल सत्याग्रह कर रहे हैं।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने सोमवार को आईएएनएस को बताया है कि सरकार की हठधर्मिता के कारण सैकड़ों परिवार भूमिहीन होने के कगार पर हैं। बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने से 200 एकड़ जमीन डूब गई है।
अग्रवाल ने आगे कहा कि वह खुद “जलसत्याग्रह पर हैं और खेत के डूबने से प्रभावित हुए किसानों को पुर्नवास का लाभ मिलना चाहिए और साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के मुताबिक भूमि के बदले भूमि और मुआवजा दिया जाना चाहिए था, लेकिन राज्य में ऐसा नहीं हुआ। प्रभावितों को जब तक लाभ नहीं मिलता तब तक यह जल सत्याग्रह जारी रहेगा।”
वही सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रदेश की महत्वाकांक्षी ओंकारेश्वर सिंचाई परियोजना के तहत लंबे समय से सूखे पड़े नहर में रविवार को जल प्रवाहित किया गया। इससे अंचल के किसानों में भारी उत्साह है और वे अपने तरीके से इस सौगात का स्वागत कर रहे हैं। नहर में जैसे-जैसे जल-प्रवाह आगे बढ़ रहा है और अंचल के किसान पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना के साथ नर्मदा जल का स्वागत कर रहे हैं।
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