अदालत का वोडाफोन डी-मर्जर पर रोक लगाने से इंकार

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि कर विभाग कानून के तहत वोडाफोन पर कर लगा सकती है। वहीं वोडाफोन के टॉवर कारोबार के डी-मर्जर से संबंधित एक अन्य मामले में अदालत ने कहा कि डी-मर्जर को रोका नहीं जा सकता है।

न्यायमूर्ति मुहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति की पीठ ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश में कर लगाने के विभाग के अधिकार की पूरी सुरक्षा की गई है।

पीठ ने एक तरह से गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को ही फिर से स्वीकृति दी, जिसमें 2012 में वोडाफोन के टॉवर कारोबार को अलग करने की मंजूरी दी गई थी। इस मामले में कर विभाग ने सरकार को 1,200 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही थी।

विभाग ने गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। विभाग ने कहा था कि कंपनी कर चुकाने से बचने के लिए आपत्तिजनक रास्ता अख्तियार करते हुए टॉवर कारोबार को एक अलग कंपनी के रूप में अलग कर रही है।

गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को ही बहाल करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस हस्तांतरण पर कर संबंधी कार्रवाई करने के अधिकार को सुरक्षित रखा गया है।

पीठ ने यह पूछा कि निजी व्यवस्था में कर विभाग दखलंदाजी क्यों कर रहा है।

कर विभाग ने वोडाफोन से 11,200 करोड़ रुपये के एक अन्य कर की मांग की है। यह मामला 2007 में भारतीय दूरसंचार कंपनी हचिसन एस्सार में हचिसन वैंपोआ की हिस्सेदारी के अधिग्रहण से संबंधित है। कंपनी ने इस मांग को भी अदालत में चुनौती दी है।

वोडाफोन के साथ ही कर संबंधी एक अन्य विवाद में सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय के 10 अक्टूबर, 2014 के फैसले को चुनौती नहीं देने का फैसला किया है। इस फैसले में अदालत ने कहा था कि वोडाफोन ट्रांसफर प्राइसिंग के मामले में वोडाफोन पर 3,200 करोड़ रुपये की कर देनदारी नहीं बनती है।

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