धर्मशाला, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन की सरकार ने तिब्बत पर श्वेतपत्र जारी कर कहा है कि तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा द्वारा समर्थित ‘मध्य मार्ग नीति’ चीन को बांटने का एक प्रयास है।
तिब्बत के प्रति केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) का तिब्बत की तरफ रुख की आलोचना करते हुए इसमें कहा गया है, “चीन के संविधान के ढांचे के तहत यह वाजिव स्वायत्तता की मांग कर रहा है।”
चीनी सरकार ने बुधवार को कहा, “हाल के वर्षो में अपने कारणों से हिंसा को बढ़ावा देने के उनके प्रयास में विफलता देखी गई है। उन्होंने ‘मध्यम मार्ग’ की वकालत शुरू कर दी है।”
इसमें कहा गया है कि ‘मध्यम मार्ग’ प्रयास चीन के क्षेत्र में देश के ही भीतर एक देश बनाने का है, जिस पर दलाई लामा और उनके समर्थकों का शासन हो। इसका आंतरिक कदम अंतिम लक्ष्य पूर्ण स्वतंत्रता की तरफ है।
‘तिब्बत का विकास का मार्ग एक एतिहासिक अस्थिर लहर से चलाया जाता है।’ दस्तावेज में कहा गया है, “प्राचीन समय से तिब्बत चीनी क्षेत्र का हिस्सा रहा है और तिब्बत के लोग चीनी राष्ट्र के एक सांप्रदायिक सदस्य रहा है।”
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, आधुनिक सभ्यता की तरफ तिब्बत सबसे पहले 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना के बाद बढ़ना शुरू किया।
चीन का अधिकार होने के बाद दलाई लामा अपनी जमीन से 1959 में फरार हुए और उसके बाद से भारत में रह रहे हैं। विस्थापित तिब्बती प्रशासन भारत के उत्तरी राज्य में काम कर रहा है।
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