जानकारी मिली है कि पौरा गांव के किसान हरबंश पाठक (60) गेहूं की फसल बर्बाद होने के कारण मानसिक रूप से काफी परेशान था। उसकी हाल देख परिवार के लोग उन्हें खेत पर जाने से रोक रहे थे। लेकिन उसने नहीं माना, खेत पर पहुंच ही गया। चार एकड़ फसल बर्बाद देख वह सदमा सह न सका। सीने में दर्द उठा और खेत में ही उसके प्राण छूट गए।
परिजनों का कहना है कि गुरुवार को हरबंश की मौत से गांव में मातम छा गया। लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
मृत किसान के चार बेटे- रामअवतार, रामविलास, अरविंद, अनिल और दो बेटियां इंद्रावती देवी और आशा हैं। खेती ही उनकी जीविका का मुख्य साधन है।
तहसील प्रशासन ने सूचना पाकर मौके पर राजस्वकर्मियों को भेजकर घटना की जांच कराई।
उपजिलाधिकारी जितेंद्र मोहन सिंह ने कहा कि पीड़ित किसान परिवार को जल्द ही क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी।
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