नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सेंट स्टीफेंस के छात्र देवांश मेहता के निलंबन पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया और दिल्ली विश्वविद्यालय, सेंट स्टीफेंस कॉलेज, प्राचार्य वाल्सन थंपू, प्रोफेसर संजय राव आयदे को नोटिस जारी कर दिया।
सभी को 21 मई तक जवाब सौंपने के लिए कहा गया है।
मेहता ‘सेंट स्टीफेंस वीकली’ ऑनलाइन मैगजीन के सह संस्थापक हैं। उन्होंने कॉलेज के कदम को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय से संपर्क साधा था।
15 अप्रैल को मेहता को 23 अप्रैल तक के लिए निलंबित कर दिया गया था। सेंट स्टीफेंस के प्राचार्य वाल्सन थंपू ने मेहता को ‘अनुशासन भंग’ करने का दोषी पाया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने दिल्ली विश्वविद्यालय, सेंट स्टीफेंस कॉलेज, थांपू और प्रोफेसर राव आयडे के खिलाफ नोटिस जारी कर उनसे 21 मई तक अपना जवाब दायर करने को कहा। आयडे ने ही मामले की जांच की थी।
दर्शनशास्त्र तीसरे वर्ष के छात्र मेहता को ऑनलाइन मैगजीन शुरू करने के लिए निलंबित किया गया है।
सुनवाई के दौरान मेहता के वकील ने अदालत से आग्रह किया था उनके मुवक्किल को राय साहेब बनारसी दास मेमोरियल पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए, क्योंकि वह पहले इस सम्मान के लिए कॉलेज द्वारा चुने गए थे। बाद में विवाद को ध्यान में रखते हुए उनका नाम सूची से बाहर निकाल दिया गया।
अदालत ने हालांकि कहा कि जिस सम्मान के लिए मेहता को चुना गया था उसे अगली सुनवाई तक किसी दूसरे छात्र को नहीं दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति बाखरू ने कहा, “हम किसी को सम्मान से वंचित नहीं कर सकते।”
इस बीच अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय को मामले में ‘निष्पक्ष’ रूप से काम करने को कहा क्योंकि उसे मामले में ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ निभानी है।
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