दल ने निर्णय लिया है कि 25 अप्रैल को राष्ट्रीय लोकदल जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों तथा मण्डल अध्यक्षों की बैठक आयोजित करेगा। बैठक में किसानों के प्रति हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।
राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि मुआवजा नीति दोषपूर्ण होने के कारण राहत की आस लगाये बैठे किसानों की मौत का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ रहा है जिसकी जिम्मेदार प्रदेश एवं केन्द्र सरकार है। यदि दोनों सरकार मिलकर आपदा राहत कार्य युद्धस्तर पर संचालित करें तो किसानों की मौतों पर अंकुश लगाया जा सकता है परन्तु सरकारें सुस्ती दिखाते हुये मुआवजे के आंकड़ों में उलझकर किसानों की दुर्दशा का उपहास कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि पूरे सूबे में किसानों की मौतों की संख्या 400 पार कर चुकी हैं लेकिन उनकी सुध लेने के बजाय सरकारें राजनीतिक स्वार्थ साधने मंे जुटी हैं।
चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री की पूरी कैबिनेट उन्हीं की तरह बड़ी-बड़ी बातें कर रही है। लेकिन किसानों को राहत के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिल पायी है और प्रदेश सरकार बहानेबाजी कर रही है। दोनों सरकारे किसानों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि अरबों रुपये की फसल बबार्दी का दुख झेल रहे किसान खून के आंसू रो रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों सरकार हर रोज किसानों की मौत का इंतजार कर रही हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि रालोद राज्य सरकार से मांग करती है कि किसानों की पीड़ा को समझते हुये उनके सभी फसली ऋण और विद्युत बिल माफ कर दिये जायंे तथा दैवीय आपदा से हुयी फसल बर्बादी का मुआवजा किसानों को अतिशीघ्र दिलाया जाये।
गौरतलब है कि किसानों के लिए कांग्रेस 19 अप्रैल को दिल्ली में किसान रैली आयोजित करने जा रही है। इसी तरह रालोद 27 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर धरना देने जा रही है।
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