नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 56 दिनों के अवकाश के बाद देश की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
इस जनसभा में राहुल और सोनिया केंद्र सरकार के ‘किसान विरोधी’ भूमि अधिग्रहण विधेयक और नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे।
पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार से उबरने की कोशिशों में लगी कांग्रेस की इस ‘खेत किसान रैली’ को पार्टी के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में मायावती के मुख्यमंत्री रहते हुए 2011 में राज्य सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध स्वरूप राहुल ने भट्टा परसौल में पदयात्रा निकाली थी। राहुल एक बार फिर उसी तरह किसानों की इस रैली का नेतृत्व करते नजर आएंगे।
23 फरवरी को सदन में पेश हुए बजट सत्र के बाद से ही राहुल सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। इस बीच वह राजनीति से बिल्कुल अलग-थलग किसी अनजान जगह छुट्टियां बिताकर 16 अप्रैल को वापस लौटे।
20 अप्रैल से शुरू हो रहे मध्यांतर के बाद के बजट सत्र की ठीक पूर्व संध्या पर राहुल राष्ट्रीय राजधानी के रामलीला मैदान में किसानों की इस जनसभा को संबोधित करेंगे।
कांग्रेस 2013 में लाए गए अपने मूल विधेयक में किसी भी बदलाव का कड़ा विरोध कर रही है और उस प्रावधान को खत्म करने का विशेष तौर पर विरोध कर रही है, जिसमें भूमि अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी भूमि मालिकों की अनुमति को अनिवार्य रखा गया था।
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि लोकसभा के आगामी सत्र में वे जिस भूमि अधिग्रहण विधेयक को दोबारा पेश करने वाले हैं, कांग्रेस उसका विरोध करने के प्रति कटिबद्ध है।
आनंद ने यह भी कहा कि राहुल आगामी सत्र में इस मुद्दे पर लोकसभा में भी बोल सकते हैं।
राहुल ने वापसी के साथ ही शुक्रवार को राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश से आए किसानों के कई प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की और भूमि अधिग्रहण विधेयक के प्रति और बेमौसम बारिश के कारण फसलों को हुए नुकासन के प्रति उनकी चिंताओं पर उनसे बात की।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आईएएनएस को बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार की ‘किसान विरोधी एवं गरीब विरोधी’ नीतियों का विरोध करने के लिए विशाल रैली बुलाई गई है।
उन्होंने कहा, “हम इस बेरहम भूमि अधिग्रहण अध्यादेश-2015 का विरोध करेंगे और इसके चलते किसानों से लिए जाने वाले 200 लाख हेक्टेयर भूमि के कारण उनकी परेशानियों के लिए आवाज उठाएंगे।”
इस रैली में शामिल होने के लिए रविवार को एक 17 कोच वाली विशेष ट्रेन जयपुर से किसानों को राजधानी लेकर आएगी।
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