‘अफगानिस्तान में भारत को धैर्य, दृढ़ता दिखाने की जरूरत’

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत अफगानिस्तान में स्थिरता लाने के लिए अपने सामथ्र्य के अनुसार हर संभव कोशिश करेगा, ताकि इसकी जनता अपने पैर पर खड़ी हो सके और अपने फैसले खुद ले सके। काबुल में भारत के पूर्व राजनयिक ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के अगले सप्ताह होने वाले पहले भारत दौरे से पूर्व यह बात कही।

जयंत प्रसाद ने एक गोलमेज चर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत को अफगानिस्तान में धैर्य, दृढ़ता और दीर्घ अवधि के कार्य की जरूरत होगी, जो दशकों तक चले युद्ध के बाद उबर रहा है।

प्रसाद ने बुधवार शाम कहा कि भारत का दीर्घ अवधि का दृष्टिकोण यह है कि अफगानिस्तान बिना संसाधन के स्थिर नहीं रहेगा, वह तभी हो सकता है जब यह देश व्यापार, परिवहन का केंद्र बने और मध्य एशिया, ईरान, भारत और चीन के लिए मार्ग बन सके। अगर अफगानिस्तान में चीन की उपस्थिति रचनात्मक रहती है तो भारत उसका स्वागत करेगा।

गनी ने भारत दौरे में देरी क्यों की? जबकि वह इससे पहले पाकिस्तान तथा चीन का दौरा कर चुके हैं।

इस सवाल पर उन्होंने कहा कि गनी अफगानिस्तान के देशभक्त हैं और “हमें उन्हें उनके फैसले खुद लेने देने की आजादी देते हैं। हमें बड़ी तस्वीर देखते हैं।”

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘करेंट डेवलपमेंट इन अफगानिस्तान : पॉलिसी ऑप्शंस फॉर इंडिया’ बैठक में प्रसाद ने कहा कि गनी ने पाकिस्तान के हालिया दौरे पर पाकिस्तानी सेना के रावलपिंडी स्थित मुख्यालय गए। उनके अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामले के सलाहकार सरताज अजीज इस बात से अवगत नहीं थे कि गनी सीधे सेना के मुख्यालय जाएंगे।

गनी जानते हैं कि समस्या की जड़ कहा हैं और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ से वार्तालाप के बाद गनी ने कथित रूप से कहा कि उन्होंने वह चीज तीन घंटे में पा ली जो उनके पूर्ववर्ती 13 घंटों में ना पा सके।

इधर, संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के प्रमुख शक्ति सिन्हा ने कहा कि भारत का अफगानिस्तान में विकासात्मक सहायता आगे जारी रहेगा और अफगानिस्तान सरकार की प्राथमिकता के अनुसार काम करेगा।

सोसायटी फॉर पॉलिसी स्टडीज (एसपीएस) की तरफ से आयोजित इस चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में भारत में ज्यादा कुछ नहीं किया और सुझाव दिया कि भारत को अफगानिस्तान को निश्चित धन देने का वादा करना चाहिए न कि बजट सहायता के जरिए बड़ी राशि का।

सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति गनी पूरब-पश्चिम गलियारे को मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो कि भारत के हित में है।

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