उपजिलाधिकारी विजयनारायण सिंह ने अस्पताल पहुंच कर घायलों का हाल जाना। लोग एक बार फिर भूकंप का शोर मचाते हुए घरों और कार्यालयों से बाहर भागे। वैसे भी लोग अनहोनी की आशंका से शनिवार की रात सो नहीं पाए। अधिकांश परिवार मौसम नम होने के बाद भी घरों से बाहर खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। जिले के कुछ हिस्सों में मकानों में दरारें पड़ गई हैं।
लोग यह कहते हुए सुने गए कि अब जिंदगी जीना दुश्वार हो चला है। लोगों के चहरे पर भय और दहशत का महौल देखा गया। लोग दूसरों को हिदायतें देते सुने जा रहे हैं कि अब घरों की ओर मत लौटिए, भूकंप तबाह कर देगा। साथ ही परामर्श दिया जा रहा है कि दरवाजे को खुला रखिए।
नेपाल और बिहार में आए भूकंप के बाद लगातार जिले में इसके झटके महसूस किए जा रहे हैं। जिस समय भूकंप का दूसरे दिन तीसरा झटका आया, उस समय गोपीगंज नगर में संतोष मोदन वाल के घर निर्माण का कार्य चल रहा था। उसी दौरान कच्चे मकान की दीवार गिरने से काम कर रहा राजगीर राजेश गौतम (40) दीवार के नीचे दब गया। उसे गंभीर चोटें आई हैं। उसका पैर टूट गया है।
दूसरी घटना इसी थाने के छतमी गांव में हुई। जहां रिंकू पांडेय 30 टीनशेड पर चढ़ आम तोड़ रहा था। उसी दौरान झटका आने से टीनशेड जमीन पर आ गया, जिसके चलते उसके दोनों पैर टूट गए। दोनों घायलों का निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
वहीं बहुमंजिली मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। लोगों के चेहरे से होश उड़ गए हैं। लोग भयभीत हैं। एक के बाद एक आ रहे झटके के बाद लोगों को लग रहा है कि अब जिंदगी नहीं बचेगी। अधिकांश परिवारों में मांगलिक कार्यक्रम हैं। भूकंप के चलते वहां का माहौल बिगड़ रहा है।
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